भूपेंद्र नायक, पिटोल

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी पिटोल स्थित हनुमान टेकरी पर तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां भगवान हनुमान से शक्ति, बुद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। हनुमान जी को भक्ति, साहस और निष्ठा का प्रतीक मानते हुए भक्तों ने उनकी आराधना की।

भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ आयोजन का शुभारंभ

आयोजन की शुरुआत 31 मार्च को दोपहर 4 बजे भगवान हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। यह यात्रा हनुमान टेकरी से प्रस्थान कर पूरे पिटोल नगर में भ्रमण करते हुए गुजरी। शोभायात्रा में बैंड-बाजे और नासिक ढोल की गूंज आकर्षण का केंद्र रही। फूलों से सुसज्जित दो बग्गियों में भगवान हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान थी, जबकि एक अन्य बग्गी में पीपल खूंटा धाम के संत शिरोमणि 1008 महंत दयाराम जी महाराज विराजित थे। पिटोल नगर के सर्व सनातनी हिंदू समाज द्वारा जगह-जगह पुष्पवर्षा कर और शीतल पेय पिलाकर शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। रात 8 बजे शोभायात्रा वापस हनुमान टेकरी पहुंची, जहां महाआरती के बाद इसका समापन हुआ।

अखंड राम नाम जाप और भजन-कीर्तन

अगले दिन 1 अप्रैल को मंदिर परिसर में दिनभर अखंड राम नाम जाप और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

मंगला आरती, महायज्ञ और विशाल भंडारा

2 अप्रैल को मुख्य हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर सुबह 5:30 बजे मंगला आरती की गई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर दर्शन लाभ लिए। मंगला आरती में भगवान हनुमान जी का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को अर्पित की गई फलों और फूलों की भव्य माला दर्शनार्थियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इसके पश्चात सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक मंदिर परिसर में हवन, पूजन और यज्ञ का आयोजन संपन्न हुआ। दोपहर 12 बजे की महाआरती के पश्चात भंडारा शुरू हुआ, जो शाम 7 बजे तक चला। इसमें लगभग 15,000 श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। इस महाभंडारे में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी एक साथ शामिल होकर प्रसादी ली।

जनजातीय युवाओं की निस्वार्थ सेवा और तीन राज्यों का संगम

महाभंडारे में प्रसादी वितरण की मुख्य जिम्मेदारी स्थानीय जनजातीय समाज के युवाओं ने संभाली। इसमें मुख्य रूप से कालाखूंट, घटिया, मोदखेड़ी और मंडली बड़ी गांव के युवाओं ने अपनी निस्वार्थ सेवाएं दीं। पिटोल गांव गुजरात सीमा के समीप स्थित है, इसलिए इस आयोजन में पिटोल के आसपास के 50 गांवों के अलावा पड़ोसी राज्य गुजरात और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ लेने पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान गांव के पानी के टैंकर मालिकों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क पेयजल की उत्तम व्यवस्था की गई।

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