बृजेश खंडेलवाल की रिपोर्ट- बोरझाड़ संकुल के ग्राम बावड़ी में सहायक शिक्षक के रूप पदस्थ नानका मेड़ा का 12 वर्षीय पुत्र जो कि बालक कानाकाकड़ बालक छात्रावास मे रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह पिछले दिनों छात्रावास से अपने घर आया था और यही से रोजाना स्कूल जाने का कहकर जाता ओर रोजाना शाम को अपने घर बड़ी जुवारी आ जाता था। 23 जनवरी को अपने घर से कानाकाकड़ जाने का कह कर गया। आज दिनांक तक वह ना तो छात्रावास पहुचा ना ही स्कुल और वापस अपने घर भी नहीं लौटा। वह पिछले एक माह से अपने बड़ी जुवारी घर से स्कूल आना-जाना कर रहा था। प्रतिदिन सुबह घर से स्कुल जाने का बोलकर जाता था। 23 जनवरी को वह रोजाना की तरह स्कूल जाने का बोलकर निकला था ओर शाम को अपने घर नहीं पहुंचा। इस पर परिजनों ने स्कूल में जाकर तलाश की तो पता चला कि पिछले एक माह से मनेश मेड़ा स्कूल नहीं आया। इस बात का पता परिजनों को लगा तो निरंतर अपने रिश्तेदारों में खोजबीन की पर कही पता नही लगा। हाल ही में तत्कालीन झाबुआ में पार्थ के साथ हुई घटना को लेकर परिजन चिंतित है है कि उनके बालक किसी घटना का शिकार न हो जाए। इस घटना को लेकर बीईओ रामसिंह सोलंकी से चर्चा की तो बताया कि मनेश मेड़ा 23 दिसंबर 2017 से न तो छात्रावास आया और न ही स्कूल लगातार गैरहाजिर है। Post navigation महिला सम्मान के लिए एसपी की अनूठी मुहिम, पुरुषों को दिलवाई महिला सम्मान बनाए रखने की शपथ, करवड़ में पुलिस चौकी का शुभारंभ आदिवासी चेतना में बोले डॉ. भूरिया, जिन्होंने गरीब की थाली से मीठा छीना उन्हें कड़वे का स्वाद चखाने का वक्त