लोहित झाम, मेघनगर

नगर के आश्रय परिसर, थांदला रोड रेलवे ब्रिज के सामने आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा एवं दिव्य दरबार के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। गड़ावदिया धाम से पधारे पीठाधीश्वर परम पूज्य श्रीधर वैरागी जी महाराज के मुखारविंद से श्रद्धालुओं ने हनुमंत कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। कथा में महाराज ने भगवान श्री हनुमान जी की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही भगवान श्रीराम के त्याग, मर्यादा और जीवन गाथा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा के दौरान महाभारत प्रसंग में द्रौपदी के चीरहरण और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उनकी लाज बचाने की कथा भी सुनाई गई। महाराज ने बताया कि किस प्रकार द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपनी पुकार सुनने के लिए विवश किया और संकट की घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा की।

हनुमंत कथा के विश्राम अवसर पर महाराज श्रीधर वैरागी ने गड़ावदिया धाम एवं आसपास के क्षेत्र के संबंध में जानकारी देते हुए दावा किया कि गड़ावदिया सहित आसपास के चार गांव—लिंबापाड़ा, हवेरुंडी, रूपापाड़ा एवं गड़ावदिया में पूर्ण रूप से शराबबंदी और नशाबंदी है। उन्होंने बताया कि इन गांवों में न तो शराब बेचने की अनुमति है और न ही शराब पीकर गांव में आने की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि गड़ावदिया धाम स्थित बालाजी मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना है, जिसका जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। उनके अनुसार मंदिर में अब तक करीब 30 लाख रुपए का कार्य हो चुका है। पिछले चार वर्षों से यहां दिव्य दरबार लगाया जा रहा है। महाराज ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें बचपन से ही आध्यात्मिक अनुभूतियां होने लगी थीं और करीब आठ वर्ष की उम्र से ही उन्हें कई बातें दिखाई देने लगी थीं। इसके बाद निरंतर तपस्या और बालाजी महाराज के आशीर्वाद से वे सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि दिव्य दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। उनके अनुसार कैंसर और लकवा से पीड़ित लोगों सहित विवाह संबंधी समस्याओं को लेकर भी लोग दरबार में अर्जी लगाते हैं। महाराज ने इन मामलों में लाभ मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर कथा एवं दिव्य दरबार आयोजित करने का उद्देश्य सनातन धर्म और हिंदुत्व के प्रति लोगों की आस्था को मजबूत करना तथा अधिक से अधिक लोगों को धर्म और संस्कृति से जोड़ना है। इसी उद्देश्य से सेवा कार्य निरंतर जारी है।

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