लवेश स्वर्णकार@रायपुरिया

संयम के पथ पर चलकर आत्मा के परिष्कार के लिए तत्पर बालिका सुश्री सिद्धि रांका आगामी 6 अप्रैल 2022 को मुंबई में जैन भगवती दीक्षा अंगीकार करेगी। यह रायपुरिया सहित समूचे डूंगर अंचल के लिए समाधि के फलित होने का स्थान होगा। इस दौर में जबकि मनुष्य मात्र अपने क्षुद्र स्वार्थ और छोटे छोटे लोग के वशीभूत होकर कर्मों से ढेर सारे बंधन अपने चारों ओर बांध लेता है ऐसे समय में जब मनुष्य मात्र सुविधाओं पर बिकने मिटने वाला हाड मास का पुतला बन गया है। ऐसे दौर में 18 वर्ष की किशोर वय में बालिका सिद्धि में जैन तप परंपरा को सिंचित किया है बालिका सिद्धि रायपुरिया एक सामान्य जैन परिवार में जन्मी तथापि प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा भी उसने रायपुरिया से ग्रहण की तत्पश्चात उसकी मनोभाव भूमि पर गुरु कृपा से वीतराग का बीजारोपण हुआ। सिद्धि गुरु के संरक्षण में निरंतर तप व्रत उपवास और आराध्या के मार्ग मार्ग पर आगे बढ़ती रहे नतीजा यह हुआ कि एक समृद्ध तथा परिपूर्ण मुमुक्षु के रूप में वह भगवती दीक्षा के लिए पूर्णरूपेण तैयार हो गई। गुरु भगवन ने उसकी सन्तत्व की गहरी प्यास को देखते हुए 6 अप्रैल का दिन भगवती दीक्षा के लिए तय कर दिया सिद्धि की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे जैन दर्शन के 14 आगम कंठस्थ याद है तथा साधु जीवन के लिए पर्याप्त ग्रंथों का स्वाध्याय वह पूर्ण कर चुकी है और तपस्या के सारे अभ्यास उसने लगन पूर्वक पूर्ण करें। अब वह अपने आत्मस्वरूप निखारने के लिए पूरी तरह तैयार है पूरा अंचल अपने आप को इस अवसर पर धन्य अनुभव कर रहा है। रायपुरिया नगर मे इस प्रसंग पर भारी उत्साह का माहौल है। हर कोई सिद्धि बहन की वितराग राह पर जाने की अनुमोदना कर रहा है तीन दिवसीय कार्यक्रम सफल बनाने के लिए सकल संघ द्वारा दीक्षा महोत्सव समिति का गठन भी किया गया। जिसके तत्वाधान में दिनांक 24 मार्च को माताजी पूजन दिनांक 25 को केसर हल्दी मेहंदी बड़ी चौबीसी एवं रात्रि में अनीस राठौर एंड पार्टी मुंबई द्वारा भक्ति एवं अभिनंदन समारोह दिनांक 26 मार्च को प्रातः शोभा यात्रा वर्षी दान एवं 11:00 बजे स्वामी वात्सल्य संघ द्वारा रखा गया।

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