जितेंद्र वाणी@नानपुर
पंडित  राजेन्द्र दास जी वैष्णव के मुखारविंद से श्री मद भागवत कथा के अंतिम दिन    कृष्ण सुदामा का चरित्र वर्णन करते हुए कहा कि आज के इस भौतिक युग में सच्ची मित्रता कृष्ण और सुदामा जैसी बड़ी मुश्किल से मिलती है। हृदय में प्रेम ,करुणा, विश्वास ,स्नेह व सुख दुख का भाव परस्पर सदैव बना रहे वही सच्ची मित्रता है ।

मित्रता का भाव मन से आता है । मन में एक दूसरे के प्रति अनुराग उपजे जो एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार बने वही सच्चा मित्र कहलाता है। सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत में साथ दें।
श्री राम मंदिर परिसर से लगे वाणी समाज भवन आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन पंडित राजेन्द्र दास वैष्णव ने सुदामा चरित्र के प्रसंग पर आगे कहा कि भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता की कहानी अनूठी है ।राजा और रंक की मित्रता की ऐसी दूसरी मिसाल कहीं नहीं मिली ।कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन है। जिसे देखने वाले अचंभित रह जाते हैं।

आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। द्वारपाल के मुख से सुदामा शब्द सुनते ही भगवान कृष्ण ने अपनी सुध बुध खो दी थी और नंगे पैर द्वार की ओर दौड़ पड़े। दोनों बाहें फैलाकर उन्होंने सुदामा को हृदय से लगा लिया ।कृष्ण की आंखों से बहते आंसू ने सुदामा के पग धो दिए, उनके लाए सत्तू को बड़े स्नेह से खाया ।यह दुनिया में दोस्ती के इतिहास का सबसे बड़ा उदाहरण है।
गौरतलब है वर्षों से अनवरत कथा पाठ श्री राम मंदिर में आयोजित होता आया है । इस वर्ष थोड़ा वरहद रुप देकर समाज भवन में कर अधिक से अधिक भक्तो को कथा श्रवण का लाभ प्राप्त हो रहा है इस बार मुख्य यजमान वाणी समाज के अध्यक्ष श्री राजेंद्र वाणी (एडवोकेट) परिवार रहा।
प्रतिदिन होने वाली संगीतमय प्रस्तुति के अनेक प्रसंगों पर सुंदर भजनों पर पूरा पांडाल झूम उठा ।महिला-पुरुषों ने जमकर भक्ति भाव से नृत्य करने पर आयोजकों ने पुष्प बरसाए।
अंत मे महाआरती कर प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन किया गया । इस अवसर पर कथा समिति संरक्षक सदस्य कैलाश चंद्र समरथ मल वाणी अंतिम त्रिवेदी,नितिन वाणी कैलाश राठौड़ कनु भाई वर्मा विजय वाणी पुष्पेंद्र, प्रवीण अखलेश का पूरे सात दिन सहयोग रहा यजमान राजेन्द्र वाणी परिवार द्वारा व्यास पीठ , श्रद्धालुओं , सहयोगी जनों सहित राम मंदिर समिति का आभार व्यक्त किया ।

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