झाबुआ लाइव के लिए पिटोल से भूपेंद्रसिंह नायक की रिपोर्ट-
गांव कस्बों में लगने वाले विधिक साक्षरता शिविरों में अधिक संख्या में पहुंचकर ग्रामीण कानूनी प्रक्रियाएं, समस्याएं व उसके समाधानों को समझें व अपनें अधिकारों के लिये आगे आए। इस आशय के विचार शनिवार को पिटोल पंचायत भवन में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में झाबुआ से यहां पहुंचे न्यायाधीशों ने व्यक्त किए। शिविर में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी झाबुआ राधाकिशन मालवीय ने कहा कि न्यायालयीन प्रक्रिया में भी कई पेचीदे मामले होते है जिन्हें सुलझाना किसी चुनौती से कम नहीं। आपने कई मामलों के उदाहरण देते हुवे बताया कि क्षेत्र में नाबालिग होते हुवे अपनी मर्जी से शादी करलेने के कई मामले सामने आते है इसी क्षेत्र में एक नाबालिग लडकी के विवाह कर लेने के पश्चात माता पिता के घर नहीं जाने व पढाई करने की मंशा के बाद उसकी पेचीदगी से भी रुबरु होना पडा था हांलाकि बाद में उसे प्रशासनीक देखरेख में अध्ययन के लिये इंदौर भेजागया। इस अवसर पर दीपक कुमार अग्रवाल न्यायिक मजिस्टे्रट प्रथम श्रेणी व सुशीलकुमार गेहलोत द्वितीय श्रेणी झाबुआ नें भी घरेलू हिंसा, मध्यस्थता योजना, लोक अदालत, विधिक सहायता योजना, नागरिकों का भरणा पोषण अधिनियम नशामुक्ति, एसिड अटेक, महिला एवं बालकों की सुरक्षा योजना, लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम, नालसा एवं सालसा की विभिन्न योजनाएं दैनिक जीवन में उपयोगी सामान्य विधियों के संबंध में जैसे तय विषयों पर जानकारी दी जाना थी किन्तु शिविर में ग्रामीणों की कम उपस्थिति के कारण न्यायाधीशों ने कुछ चुनिंदा विषयों पर ही प्रकाश डाला। उपस्थित ग्रामीणों से कानूनी दिक्कतों के संबंध में पूछा। जिला विधिक सहायता अधिकारी सीमोन सूलिया ने बताया कि गरीब व्यक्ति मामलों को शिविर में लाए वकील की फीस प्राधिकरण वहन करेगा।
दहेज दापा से करें किनारा, बच्चों को पढाऐं
न्यायाधीशों ने क्षेत्र में चलने वाली दावा प्रथा पर प्रकाश डालते हए इसे कानूनी तौर पर अवैध बताते हुए इसे बंद करने के लिये कहा व सभी को अपने बच्चों को कम से कम 18 वर्ष की उम्र तक मजदूरी न कराकर पढ़ाई करवाने की सलाह दी। इस अवसर पर पिटोल उप सरपंच दिनेश मेवाड, पंच हंसराज नायक, माना गुण्डिया, जितेन्द्र पंचाल, दिनेश पंचाल,खीमा गुण्डिया, मोतिया गुण्डिया व ग्रामीणजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जयेन्द्र वैरागी ने व आभार पिटोल सरपंच काना गुण्डिया नें माना।

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