झाबुआ। विकसित भारत संकल्प संस्थान द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक ज्ञान परीक्षा हेतु झाबुआ शहर में ‘भाव संवाद संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक डॉ. महेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात टीम झाबुआ द्वारा सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। डॉ. नीरज सिंह राठौड़ ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. एमएल फुलपगारे ने स्वागत भाषण दिया।

11 आयामों के साथ विश्व गुरु बनने की परिकल्पना मुख्य वक्ता डॉ. महेश शर्मा ने ‘भारत को जानो, भारत को मानो’ और ‘प्रथम राष्ट्र’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने सेवा, सुरक्षा, शिक्षा, समर्पण, स्वावलंबन और संस्कार सहित 11 आयामों के संकल्प के जरिए भारत को पुनः विश्व गुरु और सोने की चिड़िया बनाने का आह्वान किया। डॉ. शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग एक करोड़ प्रतिभागियों को सांस्कृतिक ज्ञान परीक्षा से जोड़ने का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे विद्यार्थी और नागरिक इस परीक्षा से जुड़कर आर्थिक और बौद्धिक रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।

अतिथियों ने रखे विचार संगोष्ठी में विशेष अतिथि शिव गंगा अभियान के राजाराम कटारा, बालाजी धाम के आचार्य श्रीधर बैरागी, कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य अंजना मुवेल, अंबेडकर यूनिवर्सिटी की एचओडी संगीता मसाने, कथावाचक आचार्य अशोक पाठक, पेंशनर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष शांति वसुनिया, नेशनल कोऑर्डिनेटर राहुल पांडे और संस्कार पाठशाला के राष्ट्रीय संयोजक अशोक पाटीदार उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने वैभवशाली भारत के निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुति और सम्मान कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को जनजाति समाज की संस्कृति के प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए और लोक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। संयोजक विशाल पंड्या ने सामाजिक संस्थाओं से अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। इस दौरान कुछ नियुक्तियां कर नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए। कार्यक्रम में खरगोन, इंदौर, रतलाम, अलीराजपुर, पेटलावद, थांदला सहित गुजरात और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

इनकी रही उपस्थिति कार्यक्रम का संचालन शरद शास्त्री, डॉ. जयंत बैरागी और डॉ. अशोक बलसारा ने किया। इस अवसर पर डॉ. एमएल फुलपगरे, बापू सिंह कटारा, बलवीर सिंह डामोर, राजीव सीनम, गणपत सिंह ढकिया, कोमल सिंह डामोर, फतेह लाल वसुनिया, शांति वसुनिया, गोरी कटारा, प्रीति कनाडिया, आशा अमलियार, संतोष भूरिया, चंपा सिंगड़, अन्नु भाबर, रेखा रागनी, पायल बघेल, संगीता, कुसुम कनेश, चित्रकार जानकी डावर, ठाकुर सिंह अमलियार, सचिन अमलियार, बद्रीलाल बटोदरा, संकित तलेरा सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और प्रबुद्धजन उपस्थित थे। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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