झाबुआ – अलीराजपुर Live डेस्क रामसेतु को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। हिंदूवादी संगठन जहां दावा करते हैं कि यह वही रामसेतु है, जिसका जिक्र रामायण और रामचरितमानस में है, वहीं एक पक्ष ऐसा भी है जो इसे केवल एक मिथ या कल्पना करार देता है। साल 2007 में रामसेतु के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे से एक बड़ा राजनीतिक बवाल तक खड़ा हो गया था। हालांकि अब एक साइंस चैनल ने तथ्यों के साथ दावा किया है कि रामसेतु पूरी तरह कोरी कल्पना नहीं हो सकता है, क्योंकि इस बात के प्रमाण हैं कि भारत और श्री लंका के बीच स्थित इस बलुई रेखा पर मौजूद पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं। साइंस चैनल ने सोमवार को एक विडियो ट्विटर पर डाला, जो देखते ही देखते भारत में वायरल हो गया। विडियो में कुछ भूविज्ञानियों और वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि रामसेतु पर पाए जाने वाले पत्थर बिल्कुल अलग और बेहद प्राचीन हैं। भूविज्ञानी ऐलन लेस्टर के मुताबिक, ‘हिंदू धर्म में भगवान राम द्वारा ऐसे ही एक सेतु के निर्माण का जिक्र है। इस पर शोध करने पर पता चला कि बलुई धरातल पर मौजूद ये पत्थर कहीं और से लाए गए हैं।’ हालांकि ये पत्थर कहां से और कैसे आए, यह आज भी एक रहस्य है। पुरातत्वविद चेल्सी रोज़ कहती हैं, ‘जब हमने इन पत्थरों की उम्र पता की, तो पता चला कि ये पत्थर उस बलुई धरातल से कहीं ज्यादा पुराने हैं, जिस पर ये मौजूद हैं।’ ये पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं, वहीं जिस बलुई धरातल पर ये मौजूद हैं वह महज 4000 साल पुराना है। चैनल का दावा है कि इस स्टडी से स्पष्ट होता है यह ढांचा प्राकृतिक तो नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा बनाया गया है। चैनल के मुताबिक, कई इतिहासकार मानते हैं कि इसे करीब 5000 साल पहले बनाया गया होगा और अगर ऐसा है, तो उस समय ऐसा कर पाना सामान्य मनुष्य के लिहाज से बहुत बड़ी बात है। साभार – साइंस चैनल Post navigation 33 बरसों बाद बगास्या बाबजी के मेले का शुभारंभ, उत्साह के साथ बडी संख्या में पहुंचे क्षेत्रवासी हेड कांस्टेबल ” मुनेंद्र सिंह” ने फिर दिखाई ईमानदारी ओर कत॔व्यनिष्ठता की मिसाल