जितेंद्र वाणी, नानपुर गुड़ी पड़वा से सनातन धर्म में नए वर्ष का आरंभ ओर ग्यारस से गणगौर माताजी की बाड़ी बोई जाती हे और अमावस पर माताजी की बाड़ी में माता खेलने का प्रारंभ होता हे तिज के दिन माताजी की बाड़ी में दर्शन पूजन के बाद माताजी को रथ में रखकर घर लाते है। दो स्थानों पर माताजी की बाड़ी बोई जाती हे माली समाज की बाड़ी बुदिया बाबा माली के यहां ओर सार्वजनिक बाड़ी पंडित ओमप्रकाश नागर के यहां , एकम् ओर दूज से ही सभी समाज की महिलाएं सज धजकर ढोल से पाती लेकर नगर से निकलकर गणगौर के गीत गाकर झालरिया देती हे ओर गणगौर के गीत गाती हे यह क्रम अमावस से आरंभ हो जाता हे सभी महिलाएं एकत्रित होकर घर घर जाकर माताजी के मेंहदी के गीत भजन करती हे और तमोल की प्रसादी बाटी जाती हे l https://jhabualive.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Video-2026-03-21-at-8.21.43-PM.mp4 माली समाज के अध्यक्ष मनीष माली ने बताया कि बाड़ी से माताजी को धूम धाम से रथ में लेकर आते हे ओर घर पर पूजन के बाद खीर भात का भोग लगाकर परिवार से जोड़े से केल के पत्ते पर माताजी के सामने भोग लगा खीर भात ग्रहण करते हे बाड़ी के पुजारी ओमप्रकाश नागर ओर माली की बाड़ी के राजेश माली ने बताया कि माताजी दो दिन की पावनी के रूप में घर पर रहती हे और सेवा करते हे माताजी का विसर्जन रविवार को होगा यदि कोई यजमान माताजी को सेवा के रूप में पावनी ले जाए तो खेड़ा पर से माताजी यजमान के घर ले जाते हे अभी तक इसी रूप रेखा नहीं बनी हे घनश्याम माली ने कहा कि माताजी रविवार को ठंडी हो जाएगी l कालिका मंदिर परिसर पर भगवत कथा का सात दिवसीय आयोजन हो रहा हे सभी कथा का श्रवण करे l Post navigation नानपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बेतरतिब बाइक चलाने वाले छपरी युवाओं को दी नसीहत नानपुर में अकीदत और भाईचारे के साथ मनी ईद-उल-फितर, नमाज अदा कर मांगी अमन-चैन की दुआ