डेम के किनारे इस तरह मछली पकड़ रहे हैं लोग।

जितेंद्र वाणी, नानपुर

जिले के नानपुर क्षेत्र में स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद जोबट परियोजना के तहत बनाए गए फाटा बांध की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। भारी बारिश के बावजूद, बांध पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं है, जबकि पिछले साल इसी बांध का गेट अचानक खुलने से बड़ा हादसा होते-होते बचा था। आज भी इस जोखिम भरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण मछलियाँ पकड़ते हुए देखे गए।

पिछले वर्ष जब अचानक बांध का गेट खुल गया था, तब खंडवा-बड़ौदा मार्ग पर आवागमन रुक गया था और आस-पास के ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। किसानों की पानी की मोटरें बह गईं थीं और कई पशुओं की जान भी चली गई थी। उस घटना के बाद, जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जाँच टीम गठित की थी, लेकिन ऐसा लगता है कि उस अनुभव से कोई सबक नहीं लिया गया है।

पिछले साल एक गेट अपने आप पूरा खुल गया था। फाइल फोटो

सूत्रों के अनुसार पिछले साल गेट खुलने का कारण अज्ञात चोरों द्वारा गेट के महंगे पुर्जे चुरा लेना था। आज भी हालात वही हैं। आलीराजपुर लाइव की टीम ने जब मौके पर जाकर देखा तो बांध की सुरक्षा के लिए कोई भी अधिकारी या कर्मचारी तैनात नहीं था।

यह लापरवाही किसी भी समय एक और बड़े हादसे का कारण बन सकती है, खासकर जब मानसून अपने चरम पर है। स्थानीय लोगों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा को देखते हुए, प्रशासन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

इस मामले को लेकर जब चंद्रशेखर आजाद परियोजना फाटा डेम के एसडीओ सोलंकी से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा डेम पर हमारे तीन से चार कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहते हैं। लापरवाही बरतने जैसी कोई बात नहीं है।

 

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