झाबुआ। जिले के ग्रामीण क्षेंत्रों में शिक्षा का स्तर बद से बदत्तर है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने आपको, मामा बताकर भांजे-भांजियों के स्तर में सुधार की बात करते है वहीं आज भी ग्रामीण अंचलों में बड़ी संख्या मंे बच्चें शिक्षा से वंचित है। जो बच्चें स्कूलों में पढ़़ रहे है, उन्हें भी अध्ययन करवाने के लिए शालाओं में शिक्षक-शिक्षिकाएं नहीं आ रहे है। शालाओं में अव्यवस्थाओं का अंबार है। जिले में शिक्षा की गुणवत्ता का पता, हाल ही में आए कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणामों से चल चुका है। यह आरोप जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती भूरिया ने कहीं एवं लगाए। भूरिया ने बताया कि जब से सत्ता में भाजपा सरकार आई है, शिक्षा का स्तर काफी निम्न हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों मंे स्कूल समय पर नहीं खुल रहीं है, जो खुल रहीं है, वहां शिक्षक-शिक्षिकाएं बच्चों को अध्ययन करवाने के लिए नहीं आते है। स्कूलों में अव्यवस्थाआंे के चलते विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ नहंी मिलने से ग्रामीणजन पलायन को मजबूर हो रहे है और वे अपने साथ बच्चों को भी ले जा रहे है, जिससे वे शिक्षा से वंचित हो रहे है। सुश्री भूरिया ने आगे बताया कि पिछले दिनों हुए सर्वे से यह साफ हो चुका है कि यह जिला शिक्षा के मामले में कितना पिछड़ा हुआ है।
जिला प्रशासन को प्रयास की है आवश्यकता
भूरिया ने कहा कि तत्कालीन कलेक्टर बी. चन्द्रशेखर द्वारा जहां शिक्षा के मामले मंे विशेष प्रयास इस जिले में किए गए थे एवं उनकी प्राथमिकता भी यहीं थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद जिला प्रशासन के इस क्षेत्र में सुधार के लिए कोई प्रयास दिखाई नहीं पड़ रहे है। जिला प्रशासन को इस ओर विशेष प्रयास करते हुए जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने की सख्त आवश्यकता है।
शासन कर रहा छलावा
भूरिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार एवं वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा अच्छे दिन दिखाने के महज वादे किए गए है, लेकिन वास्तविकता कुछ ओर ही है। जिले में पिछले दिनों आए कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम के प्रतिशत से जिले के आदिवासी विकास विभाग, शिक्षा विभाग की पोल खुल गइ र्है एवं शिक्षा की गुणवत्ता का भी पता चल चुका है। भूरिया ने मांग की कि इस ओर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को गहन मंथन कर शिक्षा के स्तर में सुधार के आवश्यक प्रयास किए जाना चाहिए।

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