संजय गांधी, बोरी सर्व पितृ पक्ष के पावन अवसर पर सर्व समाज के पितरों की शांति एवं सद्गति के उद्देश्य से ग्रामवासियों द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरा कथा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अमरगढ़ वाले सुप्रसिद्ध कथा वाचक कैलाश त्रिपाठी ने प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि मानव जीवन में भक्त प्रह्लाद जैसी दृढ़ भक्ति होनी चाहिए, ताकि साक्षात परमात्मा पधारकर इक्कीस पीढ़ियों तक का उद्धार कर सकें। उन्होंने वामन चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान ने स्वयं पधारकर दानवीर राजा बलि का उद्धार किया। भक्ति के माध्यम से मनुष्य अपने कुल की कई पीढ़ियों का कल्याण कर सकता है। पं. त्रिपाठी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में मर्यादा के पालन से ही परिवार और समाज में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। जिस घर में दशरथ जैसे पिता, कौशल्या जैसी माता, भरत जैसा भाई, लक्ष्मण जैसा सेवक और हनुमान जी जैसा अनन्य भक्त हो, वह घर साक्षात राम राज्य और अयोध्या का प्रतीक बन जाता है। संसार में श्री राम जैसा पुत्र, कौशल्या जैसी माता, भरत जैसा भाई, जानकी जैसी वधू और हनुमान जी जैसा निष्काम सेवक अन्य कोई नहीं हुआ। कथा के अंतिम चरण में चंद्रवंशीय राजाओं के वंश की पावन गाथा का वर्णन किया गया। इसके पश्चात जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, समस्त श्रद्धालु भक्ति-भाव में लीन होकर झूम उठे। धर्मप्रेमी एवं समाजसेवी मनोज राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कथा एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में मातृशक्ति महिला मंडल की प्रमुख श्रीमती अंतिम भाटी सहित समस्त महिला मंडल व नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और धर्मलाभ प्राप्त किया। Post navigation हनुमंत कथा के समापन पर उमड़ा आस्था का सैलाब, जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंजा मेघनगर नवरात्रि की पंचमी तिथि पर अंबे माता को चुनरी चढ़ाने के लिए बैठक में बनाई रूपरेखा