रितेश गुप्ता @ थांदला

विगत 122 वर्ष में पहली बार कोविड 19 महामारी के चलते प्रशासनिक आदेशों का पालन करते हुए सभी समाज जन एक साथ यह पर्व नहीं मनाते हुए अलग अलग समय पर ग्रुप में जिससे की भीड़ नहीं हो ऐसी व्यवस्था की गई थी। 24 दिसम्बर रात्रि में हर वर्ष कार्यक्रम रात्रि भर मेले जैसा माहौल रहता था व मध्यरात्रि में मिस्सा पूजा व अन्य धार्मिक गतिविधियां होती थी स्थगित रही।लेकिन 25 दिसम्बर को दिन में होने वाले सभी कार्यों व पूजा पाठ विभाजित कर और अधिक उत्साह के साथ पर्व मनाया गया। प्रातः साढ़े छः बजे पहली मिस्सा दूसरी मिस्सा साढ़े आठ बजे व तीसरी मिस्सा साढ़े दस बजे रखी गई जिसमें सभी समाजजनों ने उत्साह के साथ भाग लिया ।पल्ली सचिव मथियास रावत ने बताया कि मिस्सा पूजा में पल्ली पुरोहित फादर अंतोन कटारा के अलावा सहायक फादर महेश निगेशिया फादर विशाल माल फादर सोनू वसुनिया फादर राकेश डांगी व फादर बसंत इक्का छोटी धामनी ने भाग लिया। इस अवसर पर फादर महेश ने बताया कि ईश्वर के शब्द ने देह धारण कर मानव के बीच निवास किया मानव के प्रेम के खातिर ईश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को दे दिया जिससे हम प्रेम शांति व भाईचारे का जीवन जीते हुए स्वर्ग के उत्तराधिकारी बन सकें। अंत मे पल्ली पुरोहित फादर अंतोन कटारा ने ख्रीस्त जयंती की शुभकामनाएँ देते हुए सभी का आभार माना।

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