आलीराजपुर। जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नीतू माथुर ने आदेश जारी कर जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रशासन ने कहा है कि किसान खेत साफ करने के लिए डंठलों में आग लगाते हैं,जिससे कई बार आग अनियंत्रित होकर बड़े हादसों का कारण बनती है। इससे जन-धन की हानि, संपत्ति का नुकसान, पर्यावरण प्रदूषण और पशुओं के लिए चारे की कमी जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जारी आदेश के अनुसार पराली जलाने पर किसानों पर आर्थिक दंड के रूप में 2 एकड़ तक के कृषक पर 2500 रुपए प्रति घटना, 2 से 5 एकड़ तक के कृषकों पर 5000 रुपए प्रति घटना तथा 5 एकड़ से अधिक तक के कृषकों के लिए 15000 रुपए प्रति घटना का जुर्माना लगाया जाएगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की उर्वरता घटती है और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। साथ ही खेत में मौजूद जैविक अवशेष, जो प्राकृतिक खाद का काम करते हैं, आग में जलकर समाप्त हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त हानिकारक गैसों के उत्सर्जन से वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ता है, जोकि स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव डालती है। जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने की परंपरा छोड़कर वैकल्पिक कृषि तकनीकों को अपनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहे। Post navigation शिक्षकों के हित में लोकसभा में गूंजी आवाज, TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्री एवं आलीराजपुर की प्रभारी मंत्री सम्पतिया उइके 30 मार्च को आलीराजपुर प्रवास पर रहेगी