सलमान शैख़@ पेटलावद
आखिरकार ग्रामीणों की शिकायत पर सिविल अस्पताल में डिलवरी के बाद अवैध वसूली करने वाली नर्स श्रीमती किरण तौमर पर सीएमएचओं डाॅ. जयपालसिंह ठाकुर ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इससे पहले इसी मामले में बीएमओ डॉक्टर एमएल चौपड़ा ने इस मामले में शामिल 1 सफाईकर्मी को निलंबित कर दिया था।

आज सोमवार को सीएमएचओं ने एक आदेश जारी किया। आदेश में बताया गया कि पेटलावद के बीएमओ से प्राप्त पत्र के बाद सिविल अस्पताल पेटलावद की स्टाफ नर्स श्रीमती किरण तोमर द्वारा 18 दिसंबर की रात में प्रसुता श्रीममती संतोश व श्रीमती रेखा के परिजनों से प्रसुति के एवज में धनराशि की मांग कर प्राप्त की गई थी। इस प्रकार इनका कृत्य मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम (1) के खण्ड (एक) (दो) एवं (तीन) के विपरीत है। अतः मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्टाफ नर्स श्रीमती किरण तोमर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। इसके साथ ही आदेष में यह भी निर्देषित किया कि आदेश के प्रभावशिलता के मध्य श्रीमती किरण तोमर का मुख्यालय सामुस्वाके राणापुर रहेगा। नर्स बिना पूर्व अनुमति प्राप्त किए मुख्यालय नही छोड़ेगी।
ग्रामीणों को मिला न्याय-
गौरतलब है कि पूर्व में भी सिविल अस्पताल में अवैध वसूली की शिकायतें की जाती रही थी, लेकिन कार्रवाई एक बार भी नही हो सकी थी, लेकिन इस बार ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों की सक्रियता और तत्परता के कारण ग्रामीणों को न्याय मिला। ग्रामीणों से अवैध वसूली करने वालों को सजा मिली। इस कार्रवाई के बाद कहीं न कहीं सिविल अस्पताल में अवैध वसूली करने वाले और अन्य लापरवाही बरतने वाले डाॅक्टरों और नर्सो को सीख मिलेगी।
सबसे अधिक डिलवरी, कितनी होती थी अवैध वसूली-
बता दे कि पेटलावद सिविल अस्पताल में डिलवरी के केस सबसे अधिक आते है। ऐसे में यदि इन नर्सो द्वारा एक महिला की डिलवरी के 1500 रूपए भी लिए जाते थे, तो अभी तक हजारों डिलवरी में कितनी ही अवैध वसूली इन नर्सो द्वारा की गई होगी। प्रशासनिक अधिकारियों को इस मामले में माॅनिटरिंग करनी चाहिए। ताकि फिर कोई गरीब ग्रामीण महिला के परिजन इस तरह की अवैध वसूली के शिकार न होने पाए।

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