झाबुआ लाइव के लिए परवलिया से हरीश पंचाल की रिपोर्ट–

001027midday-mealग्राम में आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित कन्या छात्रावास भ्रष्टाचार की चरागाह प्रतीत होता है। छात्रावास में वर्षो से जमी अधीक्षिका बिना भय के मनमानी करती तो छात्राओं में इतना भय है कि वह भी सही बताने से कतराती है। मामला गत दिनों जब इस प्रतिनिधि ने छात्रावास का भ्रमण किया तो कई अनियमितताएं पाई गई। प्रतिनिधि को देख अधीक्षिका इस कदर बौखला गई कि जो मन में आया बोलती गई। भ्रमण के दौरान मात्र 25 छात्राए छात्रावास में उपस्थित थी। खिचड़ी खा रही कन्याओं से जब पूछा कि क्या खाया तो कहने लगी सब्जी-रोटी। स्पष्ट है अधीक्षिका का भय कन्याओं को घूट-घूटकर पढ़ाई करने को मजबूर कर रहा है। अधीक्षिका के बारे में बताते है कि कन्याओं के नाम पर आने वाली मोटी राशि में से अपना हिस्सा कभी नही निकाला भूलती। 90 सीटो वाले छात्रावास में 85 कन्याएं दर्ज है। बताते है 85 छात्राएं में 70 प्रतिशत ही छात्रा छात्रावास में रहती, बाकि का रूपया अधीक्षिका की जेब गर्म करता। कन्या छात्रावास की उक्त अधीक्षिका मकवाना 2001 में संविदा शिक्षक के पद पर प्राथमिक विद्यालय नाथपाड़ा बेड़ावा में पदस्थ थी। तत्कालीन उच्चाधिकारी भ्रष्टों व भांजगड़ियों सहित स्वयं के रिश्तेदारों की मदद आज मकवाना अधीक्षिका बनी बैठी है। बताने वालो का तो यह भी कहना है कि शासन के नियमानुसार संविदा शिक्षक अधीक्षक बन ही नही सकता इसीलिये मकवाना अधीक्षिका के लिए अयोग्य है, बावजूद उसके गांधी छाप का जादू दिखाकर अधीक्षिका के पद पर काबिज है। कोई 10 वर्षो पर इसी पद पर अंगद के पैर की तरह जमी मकवाना की स्थिति अब यह है कि उच्चाधिकारियों का इसके मन में भय तक नही है। मकवाना की नियुक्ति तथा छात्रावास में आने वाली राशि की यदि सूक्ष्मता से जांच की जाए तो कई घपले उजागर होने की संभावना है। कन्या छात्रावास में पुरूषो के प्रतिबंध का नियम बताने वाली अधीक्षिका यह भूल बैठी का स्वयं का पति भी कन्या छात्रावास परिसर में ही निवास करता है। खैर, मामले की जांच होने पर दूध का दूध और पानी का होना तय है। मुख्यमंत्री एक ओर अपने कन्याओं को अपनी भांजीया बताते हुए न सिर्फ उनकी पढ़ाई अपितु गणवेश, साईकिल व छात्रवृत्ति भी दे रहे, परंतु आदिवासी बाहुल इस जिले के दूरदराज ईलाकों में आदिवासी ही आदिवासियों के विकास हेतु आ रहे पैसा हजम करने में लगे हुए है। आदिवासी विकास विभाग पूरे जिले में पहले ही भ्रष्टाचार को लेकर चर्चित है। इस विभाग के अंतर्गत आने वाला छोटे से छोटे शिक्षक पर आरोप प्रत्यारोप लगना आम बात हैं। मकवाना जैसी अधीक्षिका जब तक इस विभाग में नियम विरूद्ध काबिज है, तब तक तो इसका उद्धार होते दिखाई नही दे रहा है।

जिम्मेदार बोल-
मैं अभी भोपाल मे हूं आकर दिखवाता हूं मामला क्या है।
– एनएस श्रीवास्तव, संकुल प्राचार्य

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