चंद्रशेखर आजाद नगर, आरीफ हुसैन

शासकीय हायर सेकंड्री विद्यालय,सेजावाडा़ में नवीन प्रवेशोत्सव के तहत् 67 छात्र-छात्राओं को शासन की निःशुल्क साईकिल वितरण योजना के तहत् साईकिलों व पुस्तकों का वितरण मध्यप्रदेश वन विकास निगम अध्यक्ष व केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त माधवसिंह डावर,विधायक प्रतिनिधि भूपेन्द्र सिंह डावर,बरझर मंडल अध्यक्ष हिमसिंह बारिया,ग्राम सरपंच पेमला गणावा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर जवानिया सरपंच नरसिंहभाई,खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार कोरी,बीआरसी राजेन्द्र बैरागी,सुंदरलाल कुमावत,सेजावाडा़ ग्राम के वरिष्ठ पशियाभाई,मननसिंह परमार,तौलसिंह परमार,शंकरसिंह राठौर,संस्था प्राचार्य गजराज सिंह चौहान,पूर्व प्राचार्य प्रताप सिंह राठौर जन शिक्षक धनिया चौपड़ा एवं विद्यालय के स्टाफ सदस्य व स्कूली छात्र-छात्राएं की मौजूदगी में किया गया।

प्रवेश उत्सव के दौरान विद्यार्थियों के निःशुल्क साईकिल एवं पुस्तक  वितरण कार्यक्रम में म.प्र. वन विकास निगम अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त माधव सिंह डावर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेजावाड़ा जनसेवा से पहले मेरे लिये शासकीय की सेवा का क्षेत्र हुआ करता था। जहां से मैंने शासकीय सेवा त्यागकर जन सेवा का कार्य चुना जिसके चलते हैं क्षेत्र का विकास ही मेरा लक्ष्य रहा हैं। ग्राम सेजावाडा़ का समग्र विकास का उद्देश्य भी सफल हुआ। आज सेजावाडा़ में एकलव्य विद्यालय,कन्या शिक्षा परिसर,आईटीआई जैसी बड़ी-बड़ी संस्थाएं संचालित हो रही हैं। जो किसी शहरी क्षेत्र से कम नहीं है। डावर ने छात्र-छात्राओं से कहा कि विद्यार्थी जीवन से ही लक्ष्य और दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक रखना चाहिए। जीवन में कभी भी परिवर्तन हो सकता हैं। इस दौरान उन्होंने बच्चों को कई प्रासंगिक कहानी भी सुनाई। विद्यालय परिसर में पानी एवं फर्नीचर की व्यवस्था को लेकर आश्वस्त कि प्रयास कर जल्द ही निराकरण करवाऊंगा। 

विधायक प्रतिनिधि भूपेंद्र डावर ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ लेते हुए विद्यार्थी अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। अपने माता-पिता,गुरु के बताए रास्ते पर चले सभी उनका सम्मान करें| इस अवसर पर बरझर मंडल अध्यक्ष हिमसिंह बारिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण संस्था के वरिष्ठ शिक्षक प्रताप सिंह राठौड़ ने दिया। कार्यक्रम का संचालन उत्कृष्ट विद्यालय शिक्षक हेमेंद्र गुप्ता द्वारा किया गया|आभार संस्था प्राचार्य गजराज सिंह चौहान ने माना।

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