भूपेंद्रसिंह नायक, पिटोल

विगत 5 दिनों से रोजाना हजारों की संख्या में पिटोल बॉर्डर पर गुजरात से आने वाले मजदूरों के सामने स्वास्थ्य विभाग द्वारा केवल उनका टेंपरेचर नापा जा रहा है और आगे जाने दिया जा रहा है परंतु अब यहीं से इस संक्रमण के फैलने का भय बन रहा है। क्योंकि यह सभी मजदूर गुजरात के महानगरों में सूरत, भरूच, राजकोट अहमदाबाद, बड़ौदा एवं महाराष्ट्र आदि स्थानों से कभी पैदल तो कहीं गाड़ी की व्यवस्था मिल रही है उनके साथ झुंड के झुंड बिना कोई सामाजिक दूरी के पिटोल बॉर्डर तक आ रहे हैं । यह पलायन से आने वाले मजदूरों में अभी संक्रमण के लक्षण तो नहीं दिख रहे हैं परंतु जब यह पता चलेगा एवं अपने ग्रह गांव में किसी संक्रमित व्यक्ति को लक्षण मिलने पर पूरे ग्रहण गांव की स्थिति भयावह होगी और यहीं से प्रारंभ होगा । इस महामारी के प्रकोप जिसे प्रशासन को संभालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। यह पलायन से आने वाले मजदूर इतनी दूरी के हैं कहीं भिंड, ग्वालियर, झांसी, यूपी, कोटा, नीमच, रतलाम, उज्जैन, खरगोन, बड़वानी इस पूरे मध्य प्रदेश के जिले के लोग प्रतिदिन हजारों की संख्या में आ रहे हैं । अब यह तो वक्त ही बताएगा यह प्रदेश के सभी जिलों में पलायन से आने वाले लोग इस करो ना वायरस की महामारी से बचे हुए हैं या नहीं।

झाबुआ जिले के युवा आदिवासी नेताओं ने दिखाई संजीदगी
यूं तो झाबुआ जिला देश एवं प्रदेश में अति पिछड़े जिलों में अशिक्षित माना जाता है परंतु दोनों राजनीतिक राष्ट्रीय पार्टी के युवा नेता में भाजपा के पूर्व विधायक शांतिलाल बिलवाल एवं उनकी पूरी टीम विगत 3 दिनों से पिटोल बॉर्डर पर पलायन से आने वाले लोगों के सेवा कार्य में लगे हुए हैं जिनके अथक प्रयास से झाबुआ के अनुविभागीय अधिकारी डॉ अभय सिंह की टीम एवं प्रशासन द्वारा अपने ग्रह ग्राम तक इन लोगों को पहुंचाने के कार्य कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी से विधायक प्रतिनिधि डॉ विक्रांत भूरिया भी दिन में कई बार यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं एवं समय-समय पर आकर इन पलायन से आने वाले बंधुओं की जानकारी लेकर प्रशासन को अवगत कराते हैं। उनके साथ उनकी पूरी मेडिकल टीम होती है तथा वे विधायक प्रतिनिधि होने के नाते हमेशा प्रशासनिक अमले को मुस्तैद करते रहते हैं, जहां इस महामारी से बचने के लिए झाबुआ के स्वास्थ्य विभाग पुलिस विभाग जिले के नगर सैनिक के विभाग एवं समस्त लोग 24 घंटे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

सामाजिक संगठनों की भूमिका है बहुत ही सराहनीय
इस महामारी से बचने के लिए अपने घर लोग आ रहे हैं। इन हजारों की संख्या में आने वाले मजदूरों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था का जिम्मा झाबुआ पिटोल के सामाजिक संगठनों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले 4 दिनों से किया जा रहा है झाबुआ के सकल व्यापारी संघ के अध्यक्ष नीरज राठौर समस्त व्यापारी संघ के कार्यकर्ता एवं सभी दानदाताओं के सहयोग से रोजाना 10 हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। वही पिटोल के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा रोजाना समोसे खिचड़ी पानी के टैंकर जगह-जगह खड़े किए गए हैं। वहीं अपने कर्तव्य पर 24 घंटे काम कर रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए जैन समाज के समाजसेवी राजरतन एवरफ्रेश के संदीप जैन भोजन के पैकेट लाते हैं तथा आने वाले मजदूरों के लिए भी हजार से ज्यादा भोजन के पैकेट की व्यवस्था करते हैं। वही श्याम ग्रुप पिटोल द्वारा आज दो हजार नाश्ते के पैकेट का वितरण किया गया तथा पिटोल आरटीओ विभाग द्वारा चाय, बिस्किट, पोहा का वितरण किया गया जा रहा है । इन सभी भोजन खिचड़ी नाश्ता वितरण करने का कार्य चिराग फाउंडेशन एवं रोटी बैंक के कार्यकर्ता झाबुआ द्वारा वितरण किया जा रहा है। पिटोल नगर सहित समस्त आसपास के गांव के लोग इन वितरण करने वाले कार्यकर्ताओं की प्रशंसा कर रहे हैं कि इस महामारी में संक्रमित हो जाएं और डर को भूलकर यह सभी संगठन के लोग मानव सेवा नर सेवा नारायण सेवा के भाव से के साथ कार्य कर रहे हैं।

झाबुआ के परिवहन विभाग के मुख्य अधिकारी राजेश गुप्ता ने नहीं निभाई सार्थक भूमिका

जहां इस करोना वायरस की महामारी को लेकर पूरा विश्व चिंतित है। वही झाबुआ परिवहन विभाग के मुख्य अधिकारी राजेश गुप्ता ने 3 दिन बाद आज परिवहन चेकपोस्ट पेट्रोल बॉर्डर पर आए और वह भी इसलिए कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के भिंड के कुछ लोग परिचित अंकलेश्वर भरोसे सुबह 6बजे पिटोल बॉर्डर पर पहुंचे उन्हें भिंड तक पहुंचाने के लिए ऊपर से फोन आया तो भिंड वालों के लिए स्लीपर कोच बस की व्यवस्था से पहुंचाया जबकि 3 दिन से पिटोल एवं दाहोद के निजी बस मालिक मुकेश भाई , दिनेश मेवाड़ा, मधु गौतम तथा दाहोद चामुंडा बस के मालिक जीवन भाई राजकोट उनके मैनेजर आरिफ खान द्वारा अपने निजी खर्चे से इंदौर, धार,उज्जैन ,जावरा नीमच, मंदसौर, झाबुआ जिले के छोटे से छोटे गांव में अपनी बसों द्वारा अपने निजी डीजल खर्च पर पहुंचा रहे हैं। वही 3 दिन पहले आरटीओ साहब द्वारा पिटोल बॉर्डर पर 9 बस भी भेजने को कहा था जो आज तक नहीं दी गई वहीं झाबुआ के सभी मजदूर अपने अपने गांव से अपने वाहनों को बुलाकर अपने ग्राम ग्राम तक जा रहे हैं इस भयंकर विपदा के समय आरटीओ गुप्ता द्वारा यह भेदभाव पूर्ण रवैया करने के लिए सरकार एवं प्रशासन को जागना होगा और ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करना चाहिए।

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