भूपेंद्र सिंह नायक @ पिटोल

सूत्रों के अनुसार पिटोल पिटोल से पांच किलोमीटर दूर गांव रेता लुॅजा में अचानक दो मौत हो जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में निजी चिकित्सकों के यहां लगी भीड़ यह साबित कर दिया है कि कोरोना महामारी की भयावहता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है । आज पिटोल के आसपास गांव में मौत हुई इसी वजह से अब आदिवासी समाज में भी डर का वातावरण निर्मित होता जा रहा है और वे भी भीड़भाड़ से दूर रहना चाहते हैं तथा सुरक्षा के लिए मास्क पहनते हैं जो जागरूक हुए हैं वह तो दूसरों को भी जागरूक करें। इस बीमारी की गंभीरता को समझ रहे हैं। वहीं कहीं का कई ग्रामीण अभी भी लापरवाही से बिना मास्क एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में घूम रहे हैं।*प्रशासन दिख रहा है लाचार*

सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लाख बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं वही ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य को लेकर सजगता की जरूरत है ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं ।निजी चिकित्सकों के क्लिनिको पर हमेशा प्रशासन का डंडा चलता है। वही निजी चिकित्सक इस महामारी वाली परिस्थिति में ग्रामीणों की देखरेख कर दवाई दे रहे हैं ।ग्रामीण निजी चिकित्सक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम लोग कोरोना संक्रमित लक्षण वाले मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं ।उन्हें लक्षण देखकर समझा-बुझाकर झाबुआ जिला चिकित्सालय एवं दाहोद की सरकारी अस्पताल झायडस में जाने की सलाह देते हैं परंतु मौसम बदलने पर सर्दी खांसी सामान्य बुखार के मरीजों की दवाई दे रहे हैं। वहीं ग्रामीण लोग सरकार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के लिए नहीं जाता है ।अगर यही मरीज सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करें तो प्रशासन बीमारी से मरीजों को संभालने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ेगी ।वहीं जिले के मुखिया सहित कई डॉक्टर जिला चिकित्सा अधिकारी टीकाकरण अधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी करोना संक्रमित हैं तो आम जनता में कितना करोना का संक्रमण है एक सोचनीय विषय है?

*व्यापारियों का स्वैच्छिक बंद पूर्ण रूप से सफल रहा*

कोरोना महामारी की संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए पिटोल के छोटे बड़े सभी व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान पूर्ण बंद कर व्यापार नहीं किया जैसा कि पिछले लॉकडाउन में चोरी-छिपे व्यापार किया था परंतु आज इतना डर बैठ गया कि कहीं भी किसी व्यापारी व्यापार नहीं किया!

*इनका कहना है*

मौसम बदलने से अभी हाथ पैर दर्द कमर दर्द सुखी खांसी एवं सिर दर्द तेज बुखार के साथ मौसम के मौसम के अनुकूल सामान्य से सर्दी खांसी हो सकती है इसी वजह से मौसमी बीमारियां बढ़ रही है मौसमी बीमारी कारण शरीर के शारीरिक कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले बीमारों करोना संक्रमण के लक्षण दिखाई देने के साथ ही हम समझाते हैं कि बड़े सरकारी अस्पतालों में जाकर इलाज कराओ परंतु जब स्थिति नहीं संभालती है इलाज के लिए जाते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है।- डॉक्टर अंतिम बडोले  मेडिकल अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिटोल

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