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झाबुआ लाइव के लिए झकनावदा से जितेंद्र राठौड़ की रिपोर्ट-
भारत गांवों मे बसता है व ग्रामीण पत्रकार समाचारों की रीढ़ है। निवाली से लेकर न्यूयार्क तक पॉलिथीन व पॉलिटिक्स ही हावी है। पत्रकारिता का पहला ककहरा वही सीखता है जिसने आम आदमी का दर्द जाना है। पत्रकारिता जब बिकने लगेगी तो सोशल मीडिया हावी होगी। पत्रकारिता का स्थान कभी भी सोशल मीडिया नहीं ले सकती, क्योंकि पत्रकारों के पास कथ्य व तथ्य दोनों होते है। सोशल मीडिया के पास नहीं। आपने बोध कथा के माध्यम से पत्रकारों को मीति की सीख भी दी।