पीयूष चन्देल, अलीराजपुर

इस समय सारा विश्व वैश्विक कोरोना महामारी के चलते उससे लड़ने में लगा है, वही उदयगढ़ विकास खन्ड शिक्षा अधिकारी रीता डावर द्वारा एक आदेश जारी करते हुए शिक्षकों का अप्रेल माह का वेतन रोका गया है, और आदेश के तहत शिक्षको से मुख्यालय पर उपस्थिति प्रमाण पत्र, चिकित्सा प्रमाण पत्र तथा मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा गया है। जब तक शिक्षक उक्त प्रमाण पत्र नहीं देते तब तक उनके अप्रैल माह का वेतन रोकने के आदेश है, जबकि जिले के अन्य विकास खण्ड मे इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, ना ही किसी शिक्षक का वेतन रोका गया है। ऐसे में खण्ड शिक्षा अधिकारी उदयगढ का यह एक तुगलगी फ़रमान है, जो शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाला है। एक ओर जहा स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग व अन्य कोरोना योद्धाओं को मुत्यु होने पर 50 लाख की सहायता राशी सरकार दे रही है, वही शिक्षक को इसमे शामिल नहीं किया गया है, उसके बावजूद समाज व राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानते हुए अपनी परवाह किए बिना रात दिन जिले की सीमा पर तथा कन्ट्रोल रुम में शिक्षक अपनी डुयुटी दे रहे है। ऐसे में खण्ड शिक्षा अधिकारी उदयगढ का यह आदेश शिक्षकों की मानसिकता को ठेस पहुंचाने वाला उनके मनोबल को गिराने वाला है, जबकि उदयगढ को कंटेटमेंट एरिया घोषित किया हुआ है। ऐसी स्थिति में अब शिक्षक क्या जिला प्रशासन के नियम के विरुद्ध अपनी जान जोखिम में डालकर चिकित्सा प्रमाण पत्र लेने डाक्टर के पास जाए। साथ ही मुत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता विशेष परिस्थिति मे होती है, अभी इस तरह के प्रमाण पत्र की क्या जरूरत है। प्रान्तीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश आर वाघेला ने कहा उदयगढ विकास खण्ड का खण्ड शिक्षा कार्यालय हमेशा से ही अपनी कार्य प्रणाली के लिए चर्चा मे रहा है। जहां प्रदेश व जिले के अन्य विकास खण्ड मे 12 वर्ष की सेवा अवधि पुर्ण कर चुके शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान मिल चूका है, वही उदयगढ मे अब तक क्रमोन्नति वेतनमान नहीं मिला ना ही सातवां वेतन मान प्राप्त हुआ है।
म.प्र. शासन 1 मई से शिक्षको का ग्रीष्म कालीन अवकाश घोषित कर चुका है, ऐसे मे मुख्यालय पर उपस्थिति प्रमाण पत्र, चिकित्सा प्रमाण पत्र व मुत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में शिक्षको के वेतन नहीं निकालने का यह आदेश कोरोना के चलते खण्ड शिक्षा कार्यालय व खण्ड शिक्षा अधिकारी उदयगढ की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। प्रान्तीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री वाघेला ने कहा कोरोना के कारण इस समय जब सरकार स्टे होम – सेफ़ होम का नारा दे रही है, वहां शिक्षकों से चिकित्सा प्रमाण पत्र मागना अनुचित है, जहां सरकार जनधन योजना, वृद्धा पेन्शन योजना व अन्य योजना के तहत तीन माह कि अग्रिम राशि जमा कर रही हैं। वही शिक्षकों का वेतन रोकना उनके मनोबल को गिराना जैसा है।
प्रान्तीय शिक्षक संघ के शरद क्षीरसागर, भुवान मोर्य, लालसिह डावर, राकेश खेडे, कलसिह डावर, राजेन्द्र राठौड़, धर्मेन्द्र अवास्या, गुलसिह सोलकी व इन्दरसिह मन्डलोई सहित संघ सदस्यों ने अलीराजपुर जिलाधीश से मांग की है, की उदयगढ विकास खन्ड का उक्त आदेश निरस्त करने के आदेश प्रसारित कर शिक्षकों का माह अप्रैल का वेतन अविलम्ब भुगतान करने का आदेश जारी करने की कृपा करे।

 

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