विजय मालवी, बड़ी खट्टाली जोबट तहसील अंतर्गत ग्राम छोटी खट्टाली के तुमड़िया फलिया में बुजुर्ग प्रतापसिंह पिता छितु डुडवे को आदिवासी परंपरा के अनुसार अनोखे अंदाज में अंतिम विदाई दी गई। 85 वर्षीय उम्रदराज प्रतापसिंह डुडवे के स्वाभाविक निधन के बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम यात्रा निकाली। अर्थी को सजाया गया था और ढोलक की थाप पर लोग नृत्य करते हुए मुक्तिधाम तक पहुंचे। अर्थी को कंधा देने वाले लोग भी परंपरा अनुसार थिरकते नजर आए। ग्रामीणों ने बताया कि आदिवासी समाज में यदि किसी बुजुर्ग का निधन बिना लंबे रोग या कष्ट के होता है, तो उसे जीवन की पूर्णता माना जाता है। ऐसे में अंतिम विदाई शोक के साथ-साथ सम्मान और कृतज्ञता के रूप में उत्सव की तरह दी जाती है। अंतिम यात्रा के दौरान अनाज, कुल्हाड़ी, तांबे के बर्तन और आभूषण भी अर्थी के साथ रखे गए, जो दिवंगत के श्रम और पारिवारिक जीवन के प्रतीक माने जाते हैं। Post navigation गरबा महोत्सव में प्रतिभाओं का सम्मान, विभिन्न वर्गों के विजेताओं को किया पुरस्कृत