डोल ग्यारस पर भक्ति के रंग में रंगा पेटलावद, राठौड़ समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा

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पेटलावद। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों से सजा माहौल और भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण की डोल के साथ मंगलवार को देवझूलनी एकादशी पर पेटलावद में आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षत्रिय सकलपंच राठौड़ समाज द्वारा डोल ग्यारस के अवसर पर श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, अंबिका चौक से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु शामिल हुए। जावरा का प्रसिद्ध बैंड एवं डोल आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। शोभायात्रा में पुरुष सफेद ड्रेस और साफे में तथा महिलाएं लाल और सफेद परिधान में शामिल हुईं। भगवान की डोल के साथ श्रद्धालु भक्ति भाव से नगर भ्रमण पर निकले। शोभायात्रा के मार्ग में धार्मिक माहौल के साथ जगह-जगह श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

सुबह से शुरू हुए धार्मिक आयोजन
डोल ग्यारस के अवसर पर श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई थी। सुबह 7 बजे भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद सुबह 10 बजे मंदिर के शिखर पर ध्वज चढ़ाया गया। सुबह 10.30 बजे श्री लक्ष्मीनारायणजी की आरती हुई। सुबह 11 बजे मंदिर के गर्भगृह में भगवान एवं लड्डू गोपाल को बड़ी माला पहनाने का कार्यक्रम हुआ। इसी दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यों के लिए बोलियां भी लगाई गईं। मंदिर परिसर में भगवान से जुड़े सात धार्मिक कार्यों के लिए बोली रखी गई। इनमें भगवान को दो बड़ी माला पहनाने का लाभ, भगवान लड्डू गोपाल को प्रथम माला पहनाने का लाभ, भगवान को पालकी में विराजित करने का लाभ, भगवान को 11 माला पहनाने का लाभ, राम मंदिर राजापुरा की महाआरती का लाभ, शोभायात्रा के पश्चात भगवान को मंदिर में विराजित करने का लाभ तथा शोभायात्रा के पश्चात भगवान की आरती का लाभ शामिल रहा। सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए फरियाली खिचड़ी का वितरण किया गया। समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान भी किया गया। इसके बाद दोपहर 12 बजे अंबिका चौक स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर से शोभायात्रा रवाना हुई।

इन मार्गों से निकली शोभायात्रा
शोभायात्रा श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर से निकलकर गणपति चौक, पुराना नाका, सांई मंदिर गली होते हुए गांधी चौक पहुंची। यहां से भैरू चौक होते हुए राजापुरा पहुंची, महाआरती का लाभ लिया गया। इसके बाद शोभायात्रा बड़ा राम मंदिर पहुंची, जहां महाआरती हुई। यहां से सुभाष मार्ग होते हुए शोभायात्रा पुनः श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, अंबिका चौक पहुंची।

बैंड और डोल रहे विशेष आकर्षण
इस बार शोभायात्रा में जावरा का प्रसिद्ध बैंड एवं डोल विशेष आकर्षण रहे। बैंड और डोल की धुनों के बीच श्रद्धालु उत्साह के साथ शामिल हुए। भगवान की डोल और धार्मिक स्वरूप ने शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाई।

शाम को 101 दीपकों से हुई महाआरती
डोल ग्यारस के अवसर पर शाम 6 बजे राम मंदिर, राममोहल्ला में 101 दीपकों से महाआरती का आयोजन किया गया। वहीं शाम को निजी गार्डन , पर भोजन प्रसादी एवं फरियाली की व्यवस्था की गई। डोल ग्यारस उत्सव 2026 के पूरे आयोजन की व्यवस्था आयोजन समिति द्वारा संभाली गई। समिति की ओर से समाजजनों से आयोजन को सफल बनाने के लिए तन-मन-धन से सहयोग का आह्वान किया गया था।धार्मिक कार्यक्रमों, भगवान की डोल, बैंड-डोल और बड़ी संख्या में समाजजनों की सहभागिता से डोल ग्यारस का यह आयोजन पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।

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