रेनेसां विश्वविद्यालय इंदौर में “विचारों की मैराथन” राष्ट्रीय कार्यक्रम में झाबुआ के युवाओं को सम्मान

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अशोक बलसोरा झाबुआ 

17 मई रविवार को इंदौर स्थित रेनेसां विश्वविद्यालय में आयोजित “विचारों की मैराथन” एवं “आइडिया सबमिट” कार्यक्रम में झाबुआ जिले के ग्रामीण युवाओं ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त किया। यह उपलब्धि जनजातीय समाज की सृजनात्मकता, परंपरागत ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है।

कार्यक्रम में देशभर से लगभग 10,000 आइडिया प्रस्तुत किए गए, जिनमें से केवल 100 श्रेष्ठ आइडिया का चयन कर उन्हें मोमेंटो से सम्मानित किया गया। झाबुआ के युवाओं का आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर सातवें स्थान पर चयनित हुआ, जो जिले के लिए गर्व का विषय है। साथ ही उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मान राशि (1 लाख चेक) भी प्रदान की गई।

इस राष्ट्रीय मंच पर झाबुआ से भारत घुमक्कड़ समाज दर्शन फाउंडेशन के प्रतिनिधि के रूप में कुमारी गोमती खोखर, पारी अमलियार, रवेसिंह बिलवाल, ज्योति मंडोड सहित अन्य युवाओं की सक्रिय सहभागिता रही।

झाबुआ के युवाओं द्वारा जनजातीय साहित्य डॉक्यूमेंटेशन, ट्राइबल टूरिज्म एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को विशेष सराहना मिली। वन उपज के मूल्य संवर्धन (प्रोसेसिंग) के माध्यम से स्थानीय संसाधनों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने का प्रयास भी उल्लेखनीय है। विशेष रूप से झाबुआ का महुआ, अब सूखे मेवों के रूप में देश-विदेश तक अपनी पहचान बना रहा है।

ट्राइबल टूरिज्म के माध्यम से झाबुआ की सार्वभौमिक एवं जीवनदायी परंपराओं को समझने हेतु देशभर से लोग यहाँ आ रहे हैं। झाबुआ अंचल अपनी लगभग 7000 वर्ष पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जीवंत परंपराओं को आज भी संजोए हुए है, जो वैश्विक स्तर पर समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता रखती हैं।

इस अवसर पर झाबुआ के सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र डिंडोड को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो पूरे अंचल के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान न केवल झाबुआ के युवाओं के प्रयासों की सराहना है, बल्कि जनजातीय समाज के ज्ञान, संस्कृति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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