शीतला सप्तमी पर मंदिर में उमड़ा जनसैलाब

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मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

होलिका दहन के बाद लगभग एक सप्ताह तक चलने वाले हिन्दू सनातन धर्म के विभिन्न आयोजनों में अंतिम आयोजन शीतला सप्तमी का आज 10 मार्च को धूमधाम से मनाया गया।

मिली जानकारी अनुसार हिन्दू सनातन धर्म में होलिका दहन के बाद मनाए जाने वाले पर्वों में शीतलता सप्तमी विशेष महत्व रखती है।इस दिन शीतला माता को रात में बनाया गया भोजन यानि कि बासी भोजन जिसे कुछ स्थानों पर वसोडा भी कहा जाता है का भोग लगाया जाता है और इसी बासी भोजन को परिवार सहित ईष्ट मित्रों आदि को भी खाया और खिलाया जाता है,इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है।आज 10 मार्च को आम्बुआ,बोरझाड सहित ग्रामीण क्षेत्रों से अनेक भक्तों ने रात 12  बजे से शीतला माता मंदिर में आना प्रारंभ किया जोकि दोपहर तक ऐसा ही सिलसिला चलता रहा यह पर्व विशेष कर महिलाओं का रहता है इसलिए महिलाओं की अधिक भीड़ उमड़ी।

आम्बुआ में शीतलता माता मंदिर क़स्बे से बाहर समधनी फलिया के समीप है , दूर होने के बाबजूद पूजा अर्चना करने वाले रात्रि 11 बजे से मंदिर पहुंचने लगे थे, लेकिन वहां की व्यवस्था संभालने वाले प्रजापति समाज के कार्य कर्ताओं ने 12 बजे बाद जब सप्तमी तिथि प्रारंभ हुई तब मंदिर का दरवाजा खोला और व्यवस्थित तरीके से पंक्ति में खड़े हो कर अपनी बारी के मान से शालीनता के साथ माता जी की पूजा अर्चना कर परिवार में सुख-शांति बनी रहे की प्रार्थना की , स्मरण रहे कि आम्बुआ में स्थित शीतला माता मंदिर ऐसा मंदिर है जहां आम्बुआ के अतिरिक्त समीप ग्राम बोरझाड के भक्त भी पूजा करने हेतु आते हैं, दोनों ग्रामों के प्रजापति समाज के कार्य कर्ता इस अवसर पर व्यवस्था सम्हालते हैं जिसमें टेंट, कुर्सी,दरी तथा शीतल जल एवं विद्युत व्यवस्था प्रमुख रहती है। मार्ग में अभी लाइट की व्यवस्था नहीं होने से आने जाने वाले परेशान होते रहे,पता चला है कि खंभे लग चुके हैं तथा बहुत जल्दी इन पर बल्ब आदि लग जाएं गे अगले वर्ष श्रृद्धालुओं को परेशानी से निजात मिल जाएगी।

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