शिवा रावत, सोंडवा सोंडवा में आगामी 15 जनवरी को आयोजित होने वाले भव्य हिन्दू सम्मेलन की तैयारियों का शुभारंभ आज पूर्णतः धार्मिक, सांस्कृतिक एवं संगठनात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सोंडवा पुलिस ग्राउंड में भूमि पूजन एवं ध्वजा रोपण का पावन कार्यक्रम विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं विचारधारा के अनुरूप हिन्दू सम्मेलन आयोजक समिति द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गांव के पटेल पुजारा, वरिष्ठजनों एवं समाज के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाज से भूमि पूजन किया गया। इस दौरान वातावरण पूर्णतः श्रद्धा, अनुशासन एवं सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत रहा। इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि भव्य हिन्दू सम्मेलन में पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 उत्तम स्वामी जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा तथा उनके अमृतमय वचनों को सुनने का सौभाग्य उपस्थित जनसमुदाय को मिलेगा। गुरुदेव के वचनों से समाज में आध्यात्मिक जागरण, संस्कारों की दृढ़ता एवं राष्ट्रभाव को बल मिलने की अपेक्षा व्यक्त की गई। कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन की विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आरएसएस की संगठनात्मक कार्यशैली के अनुरूप अलग-अलग विभाग बनाकर कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपे गए, ताकि मंच व्यवस्था, अनुशासन, स्वच्छता, जल-व्यवस्था, स्वागत, प्रचार-प्रसार एवं सेवा कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सकें। स्वयंसेवकों ने सेवा भाव और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ स्वीकार कीं। हिन्दू समाज को एक सूत्र में बाँधने के उद्देश्य से सोंडवा मंडल के सात गांवों में पीले चावल, भगवा ध्वज एवं रुद्राक्ष का वितरण किया गया। यह प्रतीकात्मक आमंत्रण हिन्दू एकता, सांस्कृतिक चेतना एवं सामाजिक समरसता का संदेश लेकर घर-घर तक पहुँचाया गया। संघ के स्वयंसेवकों द्वारा प्रत्यक्ष जनसंपर्क कर सम्मेलन के उद्देश्य और महत्व को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया जा रहा है। आयोजक समिति ने बताया कि आरएसएस की “संगठन, सेवा और संस्कार” की भावना को केंद्र में रखकर इस सम्मेलन को ऐतिहासिक, प्रेरणादायी और जन-जन की सहभागिता वाला बनाया जाएगा। तैयारियाँ तीव्र गति से चल रही हैं और यह सम्मेलन समाज में सांस्कृतिक जागरण एवं एकता का सशक्त माध्यम बनेगा। Post navigation विधायक ट्रॉफी : आलीराजपुर की टीम ने कुक्षी को हराया सिंचाई के लिए बोरी बंधान कर जल संग्रह किया