अजय मोदी, सोंडवा आदिवासी अंचल में लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल के तहत सोंडवा में वर्षों से बंद पड़ी सुप्टा वादन प्रतियोगिता एक बार फिर शुरू हुई। सोमवार को खेल मैदान पर सुप्टा की धुन गूंजी तो पुरुषों ने पारंपरिक वादन किया और युवतियों ने उस पर नृत्य प्रस्तुत किया। आयोजन में आसपास के गांवों की 13 टीमों ने भाग लेकर अपनी कला और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में भीतड़ा की टीम ने बाजी मारी, जबकि सोंडवा दूसरे स्थान पर रहा। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान ने घोषणा की कि इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अब हर साल नवरात्रि की नवमी पर प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। भीताड़ा ने जीता प्रथम पुरस्कार, सुगट-बिचौली संयुक्त तीसरे स्थान पर प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर विजेता टीमों को पुरस्कृत किया गया। भीताड़ा की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त कर 11 हजार रुपए का पुरस्कार जीता। सोंडवा की टीम 7,500 रुपए के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं सुगट और बिचौली की टीमों ने संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया। दोनों टीमों को 5-5 हजार रुपए दिए गए। अन्य प्रतिभागी टीमों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेताओं को मंत्री नागर सिंह चौहान ने पुरस्कार वितरित किए। प्रतियोगिता देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। संस्कृति को सहेजने के लिए हर साल होगा आयोजन कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि सुप्टा वादन प्रतियोगिता क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। पहले यहां कई वर्षों तक इसका आयोजन होता रहा, लेकिन कुछ कारणों से यह बंद हो गई थी। पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करने के उद्देश्य से भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रतियोगिता दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हर साल नवरात्रि की नवमी पर आयोजन किया जाएगा। साथ ही क्षेत्र में पारंपरिक ढोल प्रतियोगिता शुरू करने का भी प्रयास किया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि जयपाल खरत ने कहा कि सुप्टा वादन प्रतियोगिता का दोबारा शुरू होना क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में अच्छी पहल है। आयोजन में जनपद पंचायत उपाध्यक्ष विक्रम भयड़िया, विधायक प्रतिनिधि दिलीप चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष हजरी बाई खरत, मांगीलाल रावत, राकेश सोलंकी, भुरसिंह भाई, मधु मंडलोई, भानू ठाकुर, प्रदीप सोलंकी सहित आसपास की ग्राम पंचायतों के सरपंच और ग्रामीण मौजूद रहे। Post navigation एक गांव की अजीबो-गरीब रस्म, यहां पर नवमीं को ही मनाया जाता है दशहरा पर्व