नानपुर से जितेंद्र वाणी

स्थानीय रामचौक स्थित शिवधाम में चल रही संगीतमय शिव पुराण कथा के छठे दिन व्यासपीठ से संतश्री श्यामदास महाराज ने बेटियों का महत्व बताया। उन्होंने कहा बेटा एक कुल को तारता है लेकिन बेटी दो कुल को तारती है। बेटा और बेटी में फर्क मत समझो। जो काम एक बेटी कर सकती है वो बेटा भी नहीं कर सकता, उसे को मौका देकर देखो। 

पं. श्यामदासजी ने कहा शिव पार्वती विवाह में जब हिमाचल महाराज पार्वती को विदा करते हैं तो फूट फूट करके रोते है। एक बेटी जितना अपने पिता से प्रेम करती है उतना एक बेटा नहीं कर पाता। एक पिता दो परिस्थिति में ही रोता है, एक तो बेटी की विदाई और दूसरा जब 1 पुत्र अपने पिता को दुख देता है और घर से निकालता है। तब उस पिता की आंखों से आंसू छलक जाते हैं। एक बेटी अपने पिता के घर पर तब तक हक जताती है जब तक उस घर का मुखिया उसका पिता होता है। उन्होंने कथा में पार्वती विवाह का उल्लेख करते हुए कहा कि शिवजी पार्वती को अपने साथ ले जाना चाहती थे, मगर पार्वती ने मना कर अपने पिता से मेरा हाथ मांगने को कहा है। लेकिन आज कल बेटियां थोड़े से लालच में अपने पिता को छोड़कर चली जाती है। पं. श्यामदासजी ने कहा शिव की तेज से स्वामी कार्तिकेय का जन्म हुआ। कृतिकाओं के द्वारा पालने के कारण कार्तिक नाम पड़ा था। जिन्होंने तारकासुर का अंत करके धर्म की रक्षा की। उन्होंने बिखरते परिवारों पर चिंता जताते हुए कहा कलयुग में भाई-भाई का दुश्मन बना हुआ है। ऋषियों ने व अपने पूर्वजों ने जो रीति रिवाज बनाए उसे रूढिवादीता न कहे। 

गौशाला में दी राशि

पार्वती विवाह कन्यादान में आई समस्त राशि स्थानीय गौशाला में भेंट कर उपस्थित जनों को गौ ग्रास के सहयोग करने को कहा। कथा के दौरान शिव भजनों पर हर आयु वर्ग की माता बहने, पुरुष अपने आप को नृत्य करने से नहीं रोक पाया। आज की प्रसादी के लाभार्थी राजेंद्र व राकेश कुमार गिरधरलाल वाणी रहे। पूरा पांडाल मे प्रतिदिन भक्तो की संख्या बढ़ रही है। कथा में बड़वानी, निवाली इंदौर, खट्टाली, आलीराजपुर सहित अनेक दूरस्थ स्थानों से शिव भक्त आ रहे है।

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