मॉब लिंचिंग: किसान परिवार से था बाबू, 2 छोटे-छोटे बच्चे थे, अब उनका भरण-पौषण कौन करेगा..?

सलमान शैख़@ झाबुआ LIVE
दो जून की रोटी के लिए अन्य राज्य गए दो श्रमिक युवकों को क्या पता था कि उनके वापस घर लोटने में एक को अपनी जान गंवानी पड़ेगी। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में हुई माॅब लिंचिंग की घटना ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सियासतदानों को उनकी राजनीति चमकाने का मौका जरूर मिलेगा, लेकिन ऐसी घटनाओं पर कैसे विराम लगे, इसके बारे में कोई बात नही होगी। सरकार से लेकर सिस्टम मुआवजा और कुछ लोेगो पर कार्रवाई कर मुंह मोड़ लेगी, लेकिन उस पीड़ित परिवार पर आज क्या बीत रही होगी यह दर्द कोई नही समझेगा।
दरअसल, गौ-तस्करी की आशंका में जिस युवक की जान गई और जो युवक गंभीर घायल हुआ वह आदिवासी अंचल झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील के रहने वाले है। दोनो युवक गरीब और किसान परिवार से है। पूरे अंचल में इस घटना का विरोध हो रहा है। कई आदिवासी संगठनो ने इस कृत्य की निंदा करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की राजस्थान सरकार से मांग की है।
गौरतलब है कि घटना में गंभीर घायल हुआ युवक पिंटू मप्र के झाबुआ जिले में पेटलावद तहसील के रताम्या गांव का रहने वाला है। वहीं बाबू भी इसी इसी तहसील के रामनगर के अल्स्याखेड़ी गांव का रहने वाला था। जिसकी इस घटना में मृत्यु हो गई।
उसके पिता धन्ना वसुनिया ने बताया वे किसान परिवार से है। आठ माहल पहले उसका पुत्र बाबू उसके दोस्त पिंटू के साथ राजस्थान काम करने के लिए उसके किसी परिचित के यहां गया था। मौसम को देखते हुए दोनो दोस्त बेलों को खेती-किसानी में काम करवाने के लिए बेलो को ला रहे थे, लेकिन कुछ लोगो की भीड़ ने उन्हे गौतस्कर समझ लिया और उसमें उनके पुत्र बाबू की जान चली गई। उसकी उम्र 28 वर्ष की है और उसके दो छोटे-छोटे बच्चे है। अब उन मासूमों बच्चों को उनके पिता के बिना ही आगे की जिंदगी गुजारनी पडेगी। उन्हें क्या पता था कि उनके पिता इस तरह उनके बीच से चले जाएंगे। जो दोषी है उन पर कार्रवाई भी कर दी जाए तो भी धन्ना के बेटे बाबू को नही ला सकते।
जनजाति विकास मंच ने सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन-
मंगलवार को जनजाति विकास मंच ने इस घटना की निंदा की और दोषियों पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में जनजाति विकास मंच के माध्यम से मांग की गई कि पीड़ित परिवारों को मध्यप्रदेश शासन और राजस्थान शासन की ओर से 20-20 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जावे। इस दौरान जनजाति विकास मंच झाबुआ जिला संगठन मंत्री गौरसिंह कटारा, जिला टोली सदस्य संजय भाबर रायपुरिया खंड संयोजक केहरसिंह मैडा, पेटलावद खंड संयोजक संजय मखोड़,जिला टोली सदस्य अल्केश मैडा, मुन्ना अरड, राजेश डिंडोर आदि उपस्थित थे।
सोशल मीडिया पर भी जताया विरोध-
सोशल मीडिया पर भी लोगो ने इस घटना को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। एक यूजर ने लिखा कि क्या अधिकार है इन लोेगो को जो गोरक्षा के नाम पर किसी की जान भी ले लेते है, किसने दिया ये अधिकार..। एक यूजर ने लिखा कि हैवानियत की भी हद होती है, वह दोनो तुम्हे ही खिलाने के लिए खेमती करने बैल ला रहे थे, गलत किया तुमने, तुम्हे कानून सजा देगा।