झाबुआ। केंद्र एवं प्रदेश की भाजपा की सरकार ने अपनी घटती लोकप्रियता एवं लोकसभा एवं विधानसभा के दौरान देश व प्रदेश की जनता के साथ किए गए चुनावी वादों को पूरा न कर पाने एवं जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के दिवंगत महापुरूषों को भूला कर अपने जन्मदिन के अवसर पर स्वच्छता अभियान का कार्यक्रम का लागू कर तथा गुजरात में सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण कर अपनी ब्रांडिंग कर जनता की कमाई का करोड़ो रूपया बर्बाद किया है। आज देश में कई लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन व्यापन कर रहे है न तो उनके पास तन ढंकने के लिए कपड़े है और न ही रहने के लिए मकान। केन्द्र और राज्यों की सरकार ने उन अधिकारियों के माध्यम से स्वच्छता अभियान चलाने की कोशिश की है जिनमे से अधिकांश लोग अपने नौकरों एवं अधीनस्थों के बल पर अपना जीवन व्यापन कर रहे है। ऐसे में यह जन अभियान मात्र औपचारिकता बन कर रह गया है। कई जगह तो अधिकारियों ने केवल झाडू लेकर मीडिया के सामने फोटो खींचा कर इतिश्री की। डॉक्टरों-शिक्षकों से लगवाई जा रही झाडू सांसद कांतिलाल भूरिया, जिला कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल मेहता, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया एवं जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती भूरिया ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ऐसे आयोजन से देश का कोई भला होने वाला नहीं है कुछ जगह तो अधिकारियों एवं भाजपा नेताओं दादागीरी कर डाक्टर जिसका कार्य मरीजों के स्वास्थ्य की देखरेख एवं शिक्षकों जितना कार्य छात्र-छात्राओं को शिक्षित करने के लिए होता है उन्हें झाडू लगाना और शौचालय के लिए गड्डे खुदवाना जैसा घृणित कार्य करवाया जा रहा है। इससे जनता के मन में सरकार की छवि केवल मात्र दिखावा ही साबित हो रही है। सांसद कांतिलाल भूरिया ने केन्द एवं राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जहां सरदार सरोवर बांध के लोकार्पण से केन्द्र के प्रधानमंत्री सहित मंत्रीगण एवं भाजपा शासित गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री खुश हो रहे है वहीं मध्यप्रदेश के लोग अपने क्षेत्र में बांध के कारण बेघर हो रहे है। सांसद भूरिया ने प्रदेश के मुखिया से सवाल किया है कि गुजरात में सरदार सरोवर बांध बनने से मध्यप्रदेश को एवं अन्य तीन प्रदेशों को कितने प्रतिशत लाभ हुआ जरा ये बताएं। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश सरकार बताए कि अल्पवर्षा के कारण जो क्षेत्र सूखे की स्थिति में है एवं जहां पर किसान बेमौत मर रहे है और जहां उनकी फसले बर्बाद हो चुकी है उनके लिए प्रदेश सरकार क्या कर रही है। सांसद भूरियाने कहा कि शिक्षकों को भी केवल शिक्षा के कार्य में करना चाहिए जिससे की आज के छात्र-छात्राएं अच्छा ज्ञान अर्जित कर अच्छे नागरिक बन सकें एवं देश के लिए कुछ कर सके, मप्र की सरकार शिक्षकों से शौचालय के गड्डे खुदवाने का कार्य कर रही है जो शिक्षकों के लिए बेहद ही अपमानजनक है। जिलों में शिक्षकों की बहुत ही कमी है अभी तो कई स्कूलों में अतिथि शिक्षक भी उपलब्ध नहीं है तथा बच्चों शिक्षा के अभाव में अपना रिजल्ट भी बिगाड़ रहे है। दसवी एवं 12वीं का परिणाम सबके सामने है। झाबुआ जिले में ही 4226 शिक्षकों की जरूरत है लेकिन वर्तमान में 1780 शिक्षक ही है और अभी भी लगभग 2500 शिक्षकों की जरूरत है। Post navigation जयस ने शासकीय परिसर व मंदिर के पास हो रहे अवैध शराब विक्रय बंद करने के लिए सौंपा ज्ञापन पतंजलि योग शिविर में जुटे सैकड़ों ले रहे योगा का लाभ