झाबुआ लाइव के लिए राणापुर से एमके गोयल की रिपोर्ट- हमारे हर काम से जाने अनजाने कर्म बंध हो ही जाते है। कर्म करते समय हमे स्वहित के साथ परहित का भी ध्यान रखना चाहिए। हमारी कोई वृति से किसी आत्मा को ठेस नही पहुंचना चाहिए। उक्त बाते आचार्य देवेश श्री जयंत सेन सूरीश्वर जी की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी चारित्रकलाजी ने कही। वे वर्षावास के लिए अपनी 4 शिष्याओं के साथ यहां विराजित है।राजेन्द्र भवन के देशना हाल में उनके प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में समाजजन जुट रहे है। साध्वीश्री ने बताया कि शंखेश्वर पाश्र्वनाथ भगवान की महिमा तीन जगत में है।एक दिन भी प्रतिमा अपूजनीय नही रही। मुगलों के आक्रमण के समय इस प्रतिमा की रक्षा के लिए समाज जनों ने इसे जमीन में गाड़ दिया था। जमीन में भी धरणेन्द्र देव ने नियमित इसकी पूजा की थी। गौतम कमल लब्धि तप शुरू शनिवार से परम प्रभावी गौतम कमल लब्धि तप शुरू हुआ। इसमें 28 तपस्वी भाग ले रहे है।यह तप 18 दिन तक चलेगा। तपस्वी रोजाना तप के साथ जप आराधना करेंगे। देशना हाल में वेयावच समिति द्वारा गौतम स्वामीजी की तस्वीर आकर्षक सज्जा के साथ स्थापित की गई है। साध्वीश्री की प्रेरणा से तपस्या के क्रम में इंदिरा भंसाली, अर्चना सालेचा व हेमा सालेचा का शनिवार को छठा उपवास रहा। एक दिन का मजा जीवन भर की सजा आज बच्चों के लिए दोपहर में 2 से 4 बजे तक ज्ञान शिविर का आयोजन होगा। मीडिया प्रभारी कमलेश नाहर व ललित सालेचा ने बताया कि इसमें साध्वी मंडल द्वारा बच्चों को धार्मिक ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई जायेगी।चातुर्मास के दौरान हर रविवार को आयोजित शिविर में आज की थीम एक दिन का मजा जीवन भर की सजा रहेगा। हर रविवार अलगथीम रहेगी। प्रतियोगिताए परीक्षा के साथ ही बच्चों को उपहार भी दिए जाएंगे।साध्वी मंडल के दर्शनार्थ आज दाहोद से श्रीसंघ आएगा। फोटो-3 प्रवचन देती साध्वी श्री चारित्रकला श्रीजी Post navigation आत्मा का शुद्ध स्वरूप ही मोक्ष है : चारित्रकलाजी आजाद जयंती पर हुए थांदला में आयोजन