सम्पदा ‘ मै आकर देश की जनजातियों की संस्कृति से रूबरू हुआ झाबुआ

झाबुआ लाइव के लिए विपल पांचाल
जनजातीय एवं लोकनृत्य पर एकाग्र सम्पदा जिसमे आकार झाबुआ शहर के लोग जनजातीय संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं यहाँ पर उनके तीज त्योहारो पर करने वाले लोकनृत्य का मंचन किया जा रहा है ।जिसमे वहा का परिवेश देखते ही बनता है ऐसे आयोजन से संस्कृति को बचाने का कार्य भी किया गया है।तीन दिन के कार्यक्रम के दौरान गुजरात के राठवा जनजाति की प्रस्तुति बेहद ही सराहनीय थी ।
राठवा जनजाति भील जनजाति की उप जाती है यह मुख्यत झाबुआ अलीराजपुर के सीमावर्ती गुजरात राज्य के जिले छोटा उदयपुर और बड़ौदा के आसपास निवास रत हे इन्हें राठवा कहा जाता है राठ नृत्य ढोल मांदल टिमली शहनाई के स्वर लहरियों के समन्वय से राठ नृत्य किया जाता है यह नृत्य तीज त्यौहार पर किया जाने वाला नृत्य है। इस नृत्य की गति तीव्र होकर नृत्य को आकर्षक और खुबशुरत बनाती है।
सम्पदा में राठवा के अलावा उड़ीशा का गोटीपुया,बेग जनजाति का फ़ाग,भारिया जनजाति का भरम,निमाड़ का पटीहारी और गणगोर,राजस्थान का सपेरा लोकनृत्य लोगो को अंत तक अपनी संस्कृती से रूबरू कराते रहे ।