अशोक बलसोरा, झाबुआ

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं पुलिस विभाग के समन्वय से नालसा जागृति योजना, 2025 के अंतर्गत ”सुरक्षित बचपन सुरक्षित भविष्य“ शीर्षक के तहत पॉक्सो विषय पर दिनांक 13 मई-2026 को एक दिवसीय जागरूकता शिविर एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का गरिमामयी आयोजन किया गया। यह आयोजन  प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष महोदया जिला विधिक सेवा प्राधिकरण झाबुआ  आशिता श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय विशेष न्यायाधीश  प्रदीप सोनी ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  अमरजीत सिंह सीनियर टेक्निकल एनालिस्टि यूनिसेफ भोपाल थे, जिन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। इसके पश्चात प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत हुई, जिसमें पॉक्सो कानून की बारीकियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से बेहद सरल और सुगम शब्दों में समझाया गया ताकि सभी अधिकारी इसे व्यावहारिक रूप से लागू कर सकें। कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश  प्रदीप सोनी ने अपने संबोधन में कहा कि पॉक्सो अधिनियम का निर्माण बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें एक भयमुक्त वातावरण देने के लिए किया गया है। कानून अपनी जगह सशक्त है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम इसके प्रावधानों को कितनी संवेदनशीलता के साथ लागू करते हैं। जब भी कोई पीड़ित बच्चा हमारे सामने आता है, तो एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक अभिभावक के रूप में हमारी संवेदनशीलता जागृत होनी चाहिए।

कार्यवाही के दौरान बच्चे की पहचान गोपनीय रखना और उसे किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से बचाना हमारी कानूनी और नैतिक ड्यूटी है। पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अपराधियों में कानून का खौफ हो और बच्चों में सुरक्षा का भाव। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव  शिव कुमार डावर ने अपने उद्बोधन में का कि नालसा जागृति योजना, 2025 के तहत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कानून की जानकारी को समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाना और व्यवस्था से जुड़े हर कर्मचारी को संवेदनशील बनाना है। बाल अपराधों की रोकथाम के लिए विधिक साक्षरता सबसे बड़ा हथियार है।
अक्सर जागरूकता के अभाव में कई मामले सामने ही नहीं आ पाते या रिपोर्ट करने में देरी हो जाती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का यह निरंतर प्रयास है कि कोई भी पीड़ित बच्चा या उसका परिवार विधिक सहायता से वंचित न रहे। हमारे पास पीड़ितों के लिए निःशुल्क विधिक सहायता, काउंसिलिंग और पुनर्वास के पर्याप्त प्रावधान हैं। प्रोजेक्टर के माध्यम से जो व्यावहारिक प्रशिक्षण आज  अमरजीत सिंह द्वारा दिया गया है, मुझे पूरा विश्वास है कि यह आपके दैनिक कार्यप्रणाली में अत्यंत मददगार साबित होगा। उक्त कार्यक्रम का संचालन  जिम्मी निर्मल के द्वारा किया गया एवं आभार जिला विधिक सहायता अधिकारी  जयदेव माणिक ने माना। उक्त कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  प्रतिपाल सिंह महोविया, अपर कलेक्टर  बी.एस सोलंकी, जागृति यूनिट के सदस्यगण उपस्थित रहें। कार्यक्रम से लगभग 300 महिला/पुरूष लाभांवित हुये।

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