मां भगवती की कृपा से ही सृष्टि में संपूर्ण कार्य संचालित हो रहे हैं। मां की जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा से पूजा-अर्चना करता है। उसका मां भगवती कल्याण करती हैं, सभी लोगों को श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का श्रवण करना चाहिए व श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। यह विचार पंडित नरेंद्र नंदन दवे ने व्यक्त किए। आप रविवार को श्री आई माता मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के दूसरे दिन श्रद्धालुओ के बीच कथा का वाचन कर रहे थे। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्री आईमाता मंदिर पर श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का आयोजन हो है। जिसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरूष श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे है। वहीं 13 अप्रैल शनिवार को शाम 4 बजे नवचण्डी हवन होगा। पंडित श्री दवे जिसे वेद विद्या कहते हैं योगी जिसे परा शक्ति कहते है, जिसे भक्त पार्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, कालि, सरस्वती, अन्नपूर्णा आदि नामों से पूजते हैं। यह सब परिचय उस आदिशक्ति जगत जननी जगदम्बा के ही हैं। भारत के वेद वैज्ञानिक ऋषि मुनियों उस आदि शक्ति के विस्तार और लीला को देख उन्हें मां कह कर संबोधित किया। आज शांति की तलाश करता हर मानव, संसार में सुखों को खोजता यूं ही अपने जीवन को खत्म कर देता है। पंडित दवे ने आगे कहा शांति का राजमार्ग ही इस संसार के त्याग में है ही इस संसार के भोगों में लिप्त होने मे हैं। मन को मां भगवती की शाश्वत भक्ति में लगा ही मनुष्य इस संसार में रहते हुए भी विदेह अर्थात जीवनमुक्त हो सकता है शांति का मार्ग यदि इस संसार में कोई है तो वह है ईश्वर की भक्ति है। बुद्धिमान व्यक्ति को सतकर्मो में बुद्धी का उपयोग करना चाहिए। उसी प्रकार जिसके पास धन हैं यदि वह दुखियों की सेवा में इसका उपयोग नही करता हैं तो अगले जन्म में वो निर्धन हो जाता हैं। Post navigation अब नपं की जलप्रदाय व्यवस्था बेहाल, गंदा व बदबूदार पानी किया जा रहा सप्लाय जीर्णोद्वार की राह देख रहा सिंह देवी मंदिर