झाबुआ लाइव से सलमान शैख़
यदि आपका बच्चा स्कूल जा रहा है। वह यदि स्कूल की बस या वैन से जाता है तो पहले वाहनों को चेक कर लें। स्कूल का वाहन सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन कर रहा है या नहीं। वाहन व उसका ड्राइवर व अटेंडर ऐसा तो नहीं है, जो बच्चे की जान को खतरे में डाल दे।
क्योंकि चालकों ने बच्चों की जान से खिलवाड़ फिर शुरू कर दिया है। मानक के विरुद्ध भूसे की तरह भरकर बच्चों को आए दिन स्कूल लाया जाता है और मोटी रकम अभिभावकों से वसूली किया जाता है।
क्योंकि जब तक आपका बच्चा सुरक्षित घर आ जा रहा है तब तक तो ठीक है लेकिन कोई हादसा हो जाए तो फिर आपके पास पछताने के अलावा और कोई रास्ता नही बचेगा।जी हां, यह खास गौर करने वाली बात झाबुआ जिले के पेटलावद में चल रहे प्रायवेट स्कुलो की है।
दरअसल, यहां किस तरह खुलेआम स्कूली बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी तस्वीर स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय आमतौर पर देखी जा सकती है। स्कूली बच्चों को लाने और छोड़ने के लिए शहर में बस, ऑटो और रिक्शा का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ज्यादा रुपये कमाने के चक्कर में वाहन मालिक गाड़ियों में सीटों से ज्यादा बच्चों को बैठा लेते हैं।
ओवरलोडिंग का अदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक ऑटो में 4 से 5 लोगों की बैठने की जगह होती है लेकिन ऑटो चालक इन में 17 से 18 बच्चे बैठकर ले जाते हैं। ऐसा ही हाल रिक्शा में भी देखने को मिलता है। एक रिक्शे में दो या तीन बच्चे बैठने की जगह होती है, लेकिन यहां भी 8 से 9 बच्चों को बैठाया जाता है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 25 सीटर बसों में 50-50 बच्चे बैठाए जा रहे है। लेकिन इसके बावजूद भी इन पर ना तो परिवहन विभाग कार्रवाई करता है और ना ही पुलिस। खुलेआम मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
परिजनों का कहना है कि स्कूल मनमाफिक पैसा तो वसूलते हैं लेकिन सुविधाएं नहीं देते। न तो आरटीओ ओर न ही पुलिस इस संबंध में कोई कार्रवाई करती है, लेकिन उसके बावजूद भी परिवहन विभाग और पुलिस जागने को तैयार नहीं है।
जरा-सी चूक या गड्ढा दे सकता है हादसे को अंजाम:
स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक भरकर ऑटो रिक्शा व अन्य वाहन शहर से गुजर रहे स्टेट हाईवे व अन्य सड़कों पर सरपट दौड़ते देखे जा सकते हैं। इस बीच मार्ग पर कोई गड्ढा न दिखने पर या चालक के जरा-सी चूक में नियंत्रण खो देने पर बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे ज्यादा ऑटो रिक्शा के पलटने की संभावना रहती है, चूंकि चालक के साथ वाली दोनों ओर बनी सीट पर बच्चे बैठे होते हैं, ऐसे में स्टेयरिंग (हैंडल) को चलाने में दिक्कत होती है। जिसकी अनदेखी करते हुए विद्यालय प्रबंधन व अभिभावक हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं इससे कभी भी भविष्य में बड़ी घटना हो सकती है इसके जिम्मेदारों के कान पर जूं नहीं रेंग रहा है।
नहीं कराया है मेंटेनेंस
-शनिवार को एमएस एक प्रायवेट स्कूल की बस में कुछ खराबी आ गई। जैसे तैसे ड्राइवर ने बस को रोका और वाहन का खड़ा किया। बस में करीब तीस बच्चे थे। यही हाल तकरीबन उन सभी स्कूलों की बसों का है, जो पुरानी हैं। स्कूल संचालकों ने बसों व वेनों का मैंटिनेंश नहीं कराया है। इस वजह से इन वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा पैदा हो गया है।
क्या हाल है स्कूल वाहनों का:
स्कूल बस व टेम्पो में रेलिंग नही लगी है।
-बसों व वाहनों के टायर व अन्य पार्टस भी नहीं बदले गए हैं।
-स्कूल बसों व वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगे हैं। इस वजह से ड्राइवर वाहनों को तेज गति से चलाते हैं।
-वाहनों के ड्राइवर भी अनुभवी नहीं हैं और तेज गति से चलाते हैं।
बसों की सीटें भी ठीक नहीं हैं। जिससे बच्चों को परेशानी होती है। खासतौर से उस समय जब में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे होते हैं।
यह होना चाहिए सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक
-एक प्रशिक्षित व शिक्षित हेल्पर का होना जरूरी है।
-चालक के पास कम से कम पांच साल पुराना भारी यात्री वाहन चलाने का लाइसेंस होना चाहिए।
-ड्राइवर पर कोई अपराध न हो, साथ ही एक भी बार यातायात सिग्नल के उल्लंघन पर चालानी कार्रवाई न की गई हो।
-वाहन का रंग पीला हो व अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
-खिड़कियों पर रैलिंग व जाली होना चाहिए।
-स्कूल का नाम, मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए।
-सीओ के नीचे बस्ते रखने के लिए जगह होना चाहिए।
-स्कूल बस संचालन के लिए आरटीओ का परमिट व फिटनेश सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
-वाहन 40 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से न चलें। वाहनों में स्पीड गर्वनर लगे हो।
क्या है नियम
-सभी वाहनों के पास परिवहन विभाग का परमिट होना चाहिए।
-नए वाहनों को छोड़कर सभी पुराने वाहनों के लिए परिवहन विभाग से फिटनेश प्रमाण पत्र होना चाहिए।

नोट – अगर आप झाबुआ – अलीराजपुर जिले के मूल निवासी है ओर हमारी खबरें अपने वाट्सएप पर चाहते है तो आप हमारा मोबाइल नंबर 9425487490 को पहले अपने स्माट॔फोन मे सेव करे ओर फिर Live news लिखकर एक मेसेज भेज दे आपको हमारी न्यूज लिंक मिलने लगेगी

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *