लोहित झामर, मेघनगर

मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल श्री वनेश्वर मारुति नंदन हनुमान मंदिर, फुटतालाब में आयोजित भव्य नवरात्रि महोत्सव का मंगलवार रात ऐतिहासिक समापन हुआ। दस दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में आस्था, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिला। झाबुआ, आलीराजपुर सहित आसपास के कई जिलों के साथ गुजरात और राजस्थान से भी हजारों श्रद्धालु फुटतालाब पहुंचे। मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं, वहीं आयोजन के अंतिम दिनों में भारी भीड़ के चलते कई स्थानों पर यातायात का दबाव बढ़ गया। स्थिति यह रही कि पंडाल में पैर रखने तक की जगह नहीं बची और कई श्रद्धालु चाहकर भी आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच सके।

धार्मिक नृत्य-नाटिकाओं ने बांधा समां, भारतीय संस्कृति के हुए दर्शन

महोत्सव के दसवें और अंतिम दिन राष्ट्रीय स्तर की धार्मिक नृत्य-नाटिकाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अहमदाबाद, बड़ौदा और इंदौर से आए कलाकारों के समूहों के साथ स्थानीय गरबा दलों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भजनों और धार्मिक प्रस्तुतियों के बीच 20 से अधिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमुदाय को भारतीय धर्म, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।

दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना था कि फुटतालाब जैसा भव्य और आत्मीय आयोजन कहीं देखने को नहीं मिलता। यहां प्रत्येक छोटे-बड़े व्यक्ति को जिस अपनत्व और सम्मान के साथ जोड़ा जाता है, वह दिल को छू जाता है। यही विशेषता इस महोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का बड़ा केंद्र बनाती है।

डीडी ग्रुप ने जीता प्रथम पुरस्कार

समापन समारोह में गरबा प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। डीडी ग्रुप ने प्रथम, रानू मचार ग्रुप बेड़ावली ने द्वितीय तथा मुस्कान ग्रुप फुटतालाब ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पेटलावद एसडीएम रितिका पाटीदार ने विजेता दलों को पुरस्कृत किया। उनका स्वागत सीमा सुरेश चंद्र जैन ने किया।

निर्णायक मंडल ने बताया कि इस वर्ष पुरस्कारों का निर्धारण केवल गरबे की प्रस्तुति के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि दलों द्वारा प्रस्तुत सामाजिक विषयों, उनके संदेश और समाज को जागरूक करने के प्रयासों का भी विशेष रूप से मूल्यांकन किया गया। आयोजन में सुरेश चंद्र पूरणमल जैन और परिवार की ओर से बेस्ट कपल को पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही सभी ग्रामीण गरबा दलों को सांत्वना पुरस्कार तथा प्रत्येक प्रतिभागी को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।

पप्पू भैया मित्र मंडल ने किया समाजसेवी परिवार का सम्मान

महोत्सव के अंतिम दिन पप्पू भैया मित्र मंडल के वरिष्ठ सदस्य हरिराम गिरधानी, आनंदीलाल पडियार, देवेंद्र जैन और दिनेश बैरागी ने हजारों ग्रामीण बेटियों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने और उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के प्रयासों के लिए प्रदेश के वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश चंद्र पूरणमल जैन, युवा समाजसेवी राजेश ‘रिंकू’ जैन और उनके परिवार का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

इस दौरान आयोजन से जुड़े सामाजिक सरोकारों की विशेष सराहना की गई। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच उपलब्ध कराने, उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ने और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने की पहल को महोत्सव की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया।

17 वर्षों के सफर को याद कर भावुक हुए सुरेश जैन

सम्मान समारोह के दौरान सुरेश चंद्र पूरणमल जैन भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह पल बेहद भावनात्मक है। एक छोटे से आयोजन से शुरू हुई यात्रा को 17 वर्षों में इतना विशाल और भव्य स्वरूप मिलना उनके लिए गौरव और संतोष का विषय है।

उन्होंने इस सफलता का श्रेय ग्रामीण बेटियों, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं, अपनी धर्मपत्नी, भाई राजेश रिंकू जैन और पूरे परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास, बेटियों का उत्साह और सभी सहयोगियों का समर्पण ही इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने मंच से हनुमान जी की कृपा और मंदिर में दर्शन के महत्व का भी उल्लेख किया।

श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता की मिसाल बना फुटतालाब

फुटतालाब का नवरात्रि महोत्सव वर्षों से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी प्रतीक बनता जा रहा है। यहां गरबा केवल नृत्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीण बेटियों को प्रोत्साहन, सामाजिक विषयों पर जागरूकता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

समापन अवसर पर जैकी जैन, हार्दिक कोठारी और मंदिर के महंत दिलीपदास महाराज ने आयोजन की सफलता में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, कलाकारों, गरबा दलों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। दस दिनों तक भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा फुटतालाब महोत्सव अनेक यादगार क्षणों के साथ संपन्न हुआ।

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