ब्रजेश श्रीवास्तव, छकतला पेसा एक्ट के तहत सशक्त हो रही ग्रामसभाएं अब सामाजिक और सांस्कृतिक शुद्धि की नई कहानियां लिख रही हैं। सोंडवा विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत करजवानी के अंतर्गत दुदवी की पेसा ग्रामसभा में शुक्रवार को एक अत्यंत निर्णय हुआ। उकारीया पिता कादवा ने अपने पूरे परिवार के साथ ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल सनातन धर्म में सम्मानपूर्वक घर वापसी की। उकारीया ने ग्रामसभा में बताया कि उन्होंने लालच में आकर अपनी पुरानी रीति-रिवाज और परंपराओं को त्याग दिया था। हालांकि, अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने मूल धर्म में लौटने का दृढ़ संकल्प लिया। इस ‘घर वापसी’ को संभव बनाने में पेसा ग्रामसभा की भूमिका निर्णायक रही। ग्रामसभा के अध्यक्ष कांतिलाल पिता भायसिंह ने बताया कि उकारीया ने सभा के सामने अपनी गलती स्वीकारी और मूल धर्म में वापस आने की इच्छा जताई। ग्रामसभा ने उन्हें यह पुनः अवसर दिया। उकारीया की यह घर वापसी न केवल उनके लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामसभाएँ अपने समुदाय की सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को सुरक्षित रखने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ग्रामसभा ने उकारीया को अपने रीति-रिवाज और परंपराओं को फिर से अपनाने का मौका देकर एक मिसाल कायम की है। Post navigation विजया दशमी पर बाबा देव की पूजा और शस्त्र पूजन किया सार्वजनिक गरबा पांडाल बस स्टैंड छकतला में सफल आयोजन के लिए समिति ने माना आभार