शैलेष कनेश, मथवाड सामाजिक कार्यकर्ता के गांव भ्रमण के दौरान पता चला कि जिला अलीराजपुर, तहसील सोंडवा नर्मदा क्षेत्र के गांव,फलिया जो कि पूरी तरह से शिक्षा से वंचित है जहां आज भी सैकड़ों बच्चों को स्कूल क्या होता है स्कूल में क्या पढ़ाया जाता है पता नहीं है। शिक्षा की कमी से जन जागरूकता नहीं है और शासन प्रशासन की योजनाओं से कोसों दूर है। देखा गया कि यहां का समुदाय अपनी आवश्यकताओं को शासन प्रशासन तक अवगत नहीं करा पा रहा है। नर्मदा किनारे बसे गांव के ऐसी फलिया हैं जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का पहुंच नहीं है। आवागमन के लिए रोड,बिजली,ओर शिक्षा का नामों निशान तक नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बिना देरी किए बैठक कर उसका हल निकालने के लिए चर्चा की गई । बैठक में शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए पाठशाला अभियान चलाया गया। सर्वे किया गया कि किस किस गांव, फलिया जो शिक्षा से पूरी तरह वंचित है। चिन्हित करने के बाद जनपद शिक्षा कार्यालय को लेटर के माध्यम से अवगत कराया गया जिस पर अमल कर brc सरदार चौहान जनशिक्षक को आदेशित किया की जमीनी स्तर का मुआवना किया जाए। हुकमसिंह वर्मा जो पिछले कई सालों से मथवाड़ क्षेत्र में शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं।उनके प्रयास से कई बच्चों को कॉलेज तक पहुंचाया गया जिन्होंने बिना देरी किए अवगत कराए गए गांव, पंचायत सकरजा के गांव काकडसीला , छोटी सिरखड़ी,ओर ग्राम पंचायत मथवाड़ का फलिया गुटबारी का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया और मौके पर स्कूल सेंटर का आवेदन तैयार किया गया। आजादी के 78 साल साल बाद पहली बार गांव में स्कूल खुलने लगने का खबर सुन ग्रामीणों में हर्ष का माहौल देखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि राजाओं के राज से लेकर आज तक आया जो स्थिति थी वैसी ही आज भी है। यहां न कोई जनप्रतिनिधि आता है न कोई प्रशासनिक लोग आते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता का आगमन हुआ हमारे सौभाग्य की बात है। यहां स्कूल शुरू होता है हम बच्चों पढ़ाने कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। कहा जाता है कि, शिक्षा हर समस्याओं कि चाबी है। शिक्षा से बच्चों का और समाज का भविष्य तय होता है। संविधान में मौलिक अधिकार के तहत शिक्षा को प्राथमिकता दी गई हैं। शिक्षा का अधिनियम कानून 2009 के तहत हर गांव में 1 किलो मीटर दुरी पर स्कूल होने कि बात करता है। मगर यह दावे हमेशा उन महलों ,शहरों में हि सच साबित होते है। लोक अधिकार मंच आलिराजपुर के सामाजिक कार्यकर्ता शेलेश कनेश, विजय कनेश,कचला चोधरी और मथवाड़ संकुल के शिक्षकों कि मदद से मथवाड़ क्षेत्र में पाठशाला अभियान शुरू कर स्कूल से वंचित बच्चों को चिन्हित कर स्कूल से जोड़ने के उद्देश्य से अभीयान चलाया गया। जिसके माध्यम से काकडसीला में शिक्षा विभाग ने स्कूल संचालीत करने कि अनुमति जताई। मथवाड़ प्राचार्य/हॉस्टल अधीक्षक सोमसिंह डावर ने बताया कि ऐसे क्षेत्र के बच्चों को होस्टल सुविधा की आवश्यकता है और पहली प्राथमिकता इनकी है। ओर पालकों को बच्चों को हॉस्टल में रखने के लिए प्रेरित किया ओर हर संभव मदद करने की बात कही। ग्रामीण लोगों ने शिक्षा विभाग और मथवाड़ संकुल के शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ा सोभाग्य है कि आप हमारे गांव में नर्मदा के रास्ते आएं और हमारे बच्चों को स्कूल से जोड़ने का काम किया। Post navigation ग्रामीणों को सामाजिक कुरीतियों और बाल विवाह के दुष्परिणाम बताए, जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकार दी मथवाड़ में पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस