आलीराजपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग परियोजना अलीराजपुर के अंतर्गत ग्राम सेजा (सिंधी फालिया) में मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। यहाँ पदस्थ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मंजुला लोहार ने विभाग या शासन की प्रतीक्षा किए बिना, अपने निजी खर्च से केंद्र के 3 से 6 वर्ष के बच्चों को नए कपड़ों का वितरण किया। कपड़े वितरण के दौरान मंजुला लोहार ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में स्कूली बच्चों को प्रतिवर्ष दो जोड़ी गणवेश (यूनिफॉर्म) दी जाती है। एक ही मोहल्ले में स्कूल और आंगनवाड़ी दोनों संचालित होते हैं, जहाँ ग्रामीण आंगनवाड़ी को भी ‘प्रारंभिक स्कूल’ के रूप में ही देखते हैं। मंजुला जी का तर्क है: ”आंगनवाड़ी केंद्रों में भी बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा दी जाती है। जब स्कूल के बच्चों को गणवेश मिलती है, तो आंगनवाड़ी के इन मासूमों को इससे वंचित क्यों रखा जाता है? शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी गणवेश की व्यवस्था करनी चाहिए।” अधिकारियों ने थपथपाई पीठ इस अवसर पर सेक्टर पर्यवेक्षक संगीता बघेल भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने कार्यकर्ता के इस सेवा भाव की सराहना की और वहां मौजूद माताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को प्रतिदिन आंगनवाड़ी भेजें। बघेल ने कार्यकर्ता और सहायिका को निर्देश दिए कि बच्चों को ‘खेल-खेल में शिक्षा’ (Play-way method) के माध्यम से जोड़ें ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। खिल उठे मासूमों के चेहरे सिंधी फालिया केंद्र पर जब इन मासूम बच्चों को नए कपड़े मिले, तो उनके चेहरों पर एक अलग ही चमक और खुशी देखने को मिली। ज्ञात हो कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं जिनके पास तन ढकने के लिए पर्याप्त कपड़े भी नहीं होते। ऐसे में मंजुला लोहार की यह छोटी सी पहल इन बच्चों के लिए बड़ी खुशी लेकर आई है। Post navigation आनंद संस्थान द्वारा तीन जिलों के शासकीय सेवकों को दिया गया आनंदम प्रशिक्षण मोदी सरकार का बजट गरीब किसान, युवाओं और महिलाओं को समर्पित – कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया