झाबुआ लाइव डेस्क

जिले के झकेला गांव स्थित इंदिरा गांधी आश्रम से गुरुवार 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे कक्षा तीसरी, चौथी और पांचवीं में पढ़ने वाली करीब 10 बालिकाओं के रोते हुए बाहर निकलकर करीब 2 किलोमीटर दूर ताराघाटी गांव पहुंचने का मामला सामने आया है। बालिकाओं के आश्रम से बाहर निकलने की सूचना के बाद उन्हें वापस आश्रम लाया गया।

 

ताराघाटी पहुंचीं बालिकाओं ने बताया कि आश्रम में रहने वाली कुछ अन्य बालिकाएं आए दिन उनके साथ झगड़ा और मारपीट करती हैं। उनका कहना था कि इस संबंध में आश्रम की अधीक्षिका रेखा बारिया से शिकायत करने पर भी उन्हें डांट पड़ती है। बालिकाओं ने यह भी बताया कि अधीक्षिका रात्रि में कभी आश्रम में रहती हैं और कभी नहीं रहतीं।

बताया गया कि जिस समय बालिकाएं आश्रम से बाहर निकलीं, उस समय अधीक्षिका आश्रम में मौजूद नहीं थीं। बालिकाएं करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर ताराघाटी पहुंच गईं। आश्रम में खाना बनाने वाली महिला रंगाबाई को उनके पीछे भेजा गया, लेकिन तब तक बालिकाएं काफी दूर पहुंच चुकी थीं। बाद में झकेला स्कूल के वाहन की मदद से बालिकाओं को वापस आश्रम लाया गया।

 

*बारिश के मौसम में सुरक्षा पर सवाल*

घटना ने आश्रम में रहने वाली नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर बारिश के मौसम में यदि बालिकाएं बिना किसी निगरानी के आश्रम से निकलकर दो किलोमीटर दूर तक पहुंच गईं, तो रास्ते में उनके साथ कोई अप्रिय घटना होने पर जिम्मेदारी किसकी होती, यह बड़ा सवाल है।

साथ ही बालिकाओं द्वारा दूसरी छात्राओं से झगड़े और मारपीट की शिकायत किए जाने के बाद आश्रम प्रबंधन द्वारा उनकी सुरक्षा और आपसी विवाद को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

*क्या नियमित निरीक्षण में बच्चों से पूछी जाती हैं समस्याएं?*

ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आश्रमों और छात्रावासों की व्यवस्था की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किए जाने की व्यवस्था है। ऐसे में सवाल यह भी है कि निरीक्षण के दौरान क्या वहां रहने वाले बच्चों से अलग से बातचीत कर उनकी समस्याएं और शिकायतें जानी जाती हैं? यदि ऐसा किया जाता है तो बालिकाओं द्वारा बताई जा रही आपसी मारपीट और विवाद की स्थिति सामने क्यों नहीं आई?

*अधीक्षिका ने कहा- आईडी कार्ड बनवाने कलेक्टर कार्यालय गई थी*

आश्रम की अधीक्षिका रेखा बारिया ने बताया कि घटना वाले दिन वह बालिकाओं के आईडी कार्ड बनवाने के लिए झाबुआ कलेक्टर कार्यालय गई थीं। वहां से लौटने में उन्हें समय लग गया। जैसे ही उन्हें बालिकाओं के आश्रम से बाहर जाने की सूचना मिली, उन्होंने खाना बनाने वाली बाई को उन्हें लेने के लिए भेजा। बाद में बालिकाओं को टेम्पो से वापस आश्रम लाया गया।

*फिलहाल पूरे मामले में यह जांच का विषय है कि बालिकाएं आश्रम से बाहर निकलकर करीब दो किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचीं और आश्रम में उनकी निगरानी की व्यवस्था उस समय क्या थी।*

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