भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आज़ाद नगर चंद्रशेखर आजाद नगर में पदस्थ आबकारी अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से क्षेत्र में पदस्थ रहने के बावजूद आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब के बड़े जखीरे या अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन वाहनों पर खुलेआम शराब की आवाजाही हो रही है, वहां शिकायत करने पर अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते हैं। कई बार यह कहा जाता है कि शराब ठेकेदारों और स्थानीय सहमति से बिक रही है, जिससे यह संदेश जाता है कि अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण नहीं है। इस बीच एक मामले में 18 लाख रुपये की मांग से जुड़ी शिकायत का भी उल्लेख सामने आया था। हालांकि, इस शिकायत को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए शिकायतकर्ता, जो पेशे से एक शिक्षक हैं, ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके नाम से झूठी शिकायत की गई थी और उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आबकारी अधिकारी द्वारा उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया। आबकारी अधिकारी की ओर से भी इस शिकायत को निराधार बताते हुए कहा गया है कि जांच के दौरान तथ्य सामने आने के बाद मामला स्वतः समाप्त हो गया। बावजूद इसके, स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं और अवैध शराब कारोबार पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अवैध शराब बिक्री और परिवहन पर नियमित, पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि कानून का सही तरीके से पालन सुनिश्चित हो और जनता का विश्वास बना रहे। Post navigation एनएच निर्माण में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर ग्रामीणों का विरोध, चार गुना मुआवजे की मांग थाने की दीवार पर उठा सवाल, आदिवासी दिव्यांग की जमीन को लेकर आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन