चंद्रभानसिंह भदोरिया @ चीफ एडिटर झाबुआ ओर अलीराजपुर जिले के सभी विधायक अब भाजपा के है इनमे से शांतिलाल बिलवाल को छोडकर सभी 10 से 20 साल पूरे कर चुके है .. लेकिन एक बात इस बार समझ नही आई कि चुनावी साल मे जो दशहरा पर्व आया उसमे इन पांचों विधायकों ने ” दशहरा मिलन समारोह” क्यो नही रखा ? अरे जनता को छोडिऐ साहब अपने पार्टी के कार्यकर्ताओ या पदाधिकारियों को ही ” दशहरा मिलन” भोज दे देते .. अरे इसी बहाने कम से कम अपने सक्रिय कार्यकर्ताओ से वन -2 – वन संपक॔ हो जाता ! लेकिन पता नही इन विधायकों को क्या हुआ है किसी ने दशहरा मिलन समारोह नही किया ! शायद किसी को हार का डर होगा तो किसी को टिकट कटने का तो शायद एक आध विधायक ” कंजूस रत्न ” भी होंगे । खैर दशहरा मिलन रखना ना रखना निजी फैसला है इसलिऐ कोई आपत्तिजनक नही है लेकिन भारतीय राजनीति का शिष्टाचार ओर अघोषित नियम यह कहते है कि विधायकों को दिल खोलकर दशहरा मिलन करना था । ओर अभी वे उम्मीदवार भी नही है तो खर्चा भी आयोग की निगाहों ने आने से बच जाता । खैर अब तो बात गयी ..। Post navigation ऐसे फिल्मी थानेदार थानों पर रहे तो हो जायेगा ” बंटाधार” पेटलावद से डरे ” शिवराज” ; नही आये ” जन का आशीर्वाद ” मांगने ; बिना पेटलावद समाप्त हुई जन आशीर्वाद यात्रा