थांदला गौरव तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी म. सा. के सान्निध्य में तपस्वी रवि गादिया ने 30 उपवास मासक्षमण की कठोर तपस्या पूर्ण की 

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रितेश गुप्ता, थांदला

आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म. सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेंद्रमुनिजी म. सा., रोचक वक्ता श्री संदीपमुनिजी, जयंतमुनिजी, प्रशस्तमुनिजी, सुयशमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, श्रेयांशमुनिजी, गौरवमुनिजी ठाणा 8 एवं साध्वीश्री निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी, दीप्तिजी ठाणा 4 के सानिध्य में तपस्याओं का मानो ठाठ लगा हुआ। श्रीसंघ का हर एक सदस्य अपनी शक्ति अनुसार तप आराधना में भाग लेकर अपने कर्म की निर्जरा करते हुए संघ का गौरव बढ़ा रहा है।

संयमी आत्माओं ने की तपस्वी की अनुमोदना

यहां पर तपस्वी रवि प्रकाशचंद्र गादिया ने 30 उपवास मासक्षमण की कठोर तपस्या पूर्ण की । तपस्या पूर्ण होने पर आयोजित बहुमान समारोह में संत व साध्वी मंडल ने तप की महत्ता पर प्रकाश डालकर तपस्वी के तप की अनुमोदना करते हुए खूब खूब धन्यवाद व साधुवाद दिया। वहीं परिवारजनों को भी इस कठोर तप में सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। सभा में श्री संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने विचार व्यक्त किए । मासक्षमण तपस्वी गादिया परिवार की ओर से तपस्वी के भाइयों ने सामूहिक स्तवन प्रस्तुत किया । बहुमान समारोह के पूर्व तपस्वी के आवास से जयकार यात्रा निकाली गई। यात्रा के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने समूचे मार्ग को जयकारों से गुंजायमान कर दिया। यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई पौषध भवन पर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।

 तपस्वी रवि गादिया का तप की बोली तप से लगाकर किया बहुमान

 तपस्वी रवि गादिया का तप की बोली तप से लगवाकर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से बहुमान कर अभिनंदन पत्र भेंटकर किया गया। तपस्वी का कई परिवारों व विभिन्न संस्थाओं द्वारा भी बहुमान किया गया। इस दौरान धर्मसभा में श्रावक-श्राविकाओं ने मुक्त कंठ से तपस्वी के जयकारे लगाए। संचालन श्री संघ सचिव हितेश शाहजी ने किया । वर्षावास के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह व जिज्ञासापूर्वक धर्म एवं तप आराधना में रमण कर रहे हैं। यहां कई तपस्वी मासक्षमण तप की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

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