झोसर पंचायत भवन निर्माण मामले में जांच दल गठित, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

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शान ठाकुर, पेटलावद

ग्राम पंचायत झोसर में निर्माणाधीन अटल पंचायत भवन के निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और नियम विरुद्ध राशि आहरण के मामले को ‘सीबी लाइव’ द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले में जनपद पंचायत पेटलावद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) गौरव जैन ने जांच दल का गठन करते हुए पूरे प्रकरण की मौके पर जांच कराने के आदेश जारी किए हैं। गठित जांच दल को तीन दिवस के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, सीबी लाइव ने कुछ ही घंटों पूर्व इस मामले की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाई थी, जिसमें पंचायत भवन निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति और पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज वित्तीय जानकारी के आधार पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में बताया गया था कि पंचायत भवन निर्माण कार्य की प्रगति बेहद धीमी है, जबकि निर्माण मद से लाखों रुपये की राशि पहले ही आहरित की जा चुकी है।

*37.50 लाख की लागत, लेकिन कुर्सी (प्लिंथ) भी पूरी नहीं -*

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत झोसर में 37 लाख 50 हजार रुपये की लागत से अटल पंचायत भवन का निर्माण किया जाना है। सीबी लाइव की टीम द्वारा किए गए मौके के निरीक्षण में पाया गया कि भवन की कुर्सी (प्लिंथ) का कार्य भी पूर्ण नहीं हुआ है, जबकि पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य के नाम पर पहले ही लाखों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी को लेकर स्थानीय लोगों ने भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

 *तीन सदस्यीय जांच दल गठित*

सीईओ गौरव जैन द्वारा जारी आदेश के अनुसार निर्माण कार्य की जांच के लिए तीन सदस्यीय दल का गठन किया गया है। इसमे एस.एस. भाभर सहायक यंत्री, जी.एस. अहिरवार उपयंत्री, बी.एल. मेड़ा क्लस्टर अधिकारी को शामिल किया गया है। जांच दल को निर्माणाधीन पंचायत भवन का स्थलीय निरीक्षण कर समस्त दस्तावेजों एवं निर्माण कार्य का परीक्षण करते हुए तीन दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत झोसर में निर्माणाधीन अटल पंचायत भवन से संबंधित कथित भ्रष्टाचार की खबर प्रसारित के आधार पर जांच दल का गठन किया गया है। इसके साथ ही संबंधित सरपंच-सचिव को भी जांच दल को आवश्यक अभिलेख एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अब पूरे मामले में लोगों की निगाहें जांच दल की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता, गुणवत्ता में कमी या नियम विरुद्ध भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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