इंतजार 11 दिसंम्बर काः क्या वालसिंह का खुलेगा खाता या निर्मला दोहरा पाएगी या बागी बनाएगें इतिहास..?

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झाबुआ LIVE से सलमान शेख….
पेटलावद। विधानसभा चुनावों की पिछले पखवाडेभर से अधिक समय से चल रही गतिविधियों को विराम लग गया हैं तो पेटलावद के 7 प्रत्याशीयों का भाग्य का फैसला मतदाताओं ने ईवीएम में बंदकर दिया है। प्रत्याशीयों व उनके समर्थक जीत के दावें कर रहे है। वहीं सट्टा बाजार भी भाजपा-कांग्रेस में मुख्य मुकाबला मानकर भाव बराबरी के बता रहा है।
मतदाता मतदान करने के बाद भी मौन ही है। ईवीएम मशीनों में कैद फैसले का परिणाम 11 दिसम्बर को ही आ पाएगा। सभी को बेसब्री से अब इसी दिन का इंतजार हैं। निर्दलीय प्रत्याशीयों के मैदान में होने से इस बार मतदान का प्रतिशत व मतदाता में उत्साह अधिक रहा। चैराहों पर शाम को एकत्र भीड यहीं चर्चा करते देखी जा रही है। वही राजनीतिक जानकारों से हार-जीत का गणित लिया जा रहा है।
भाजपा प्रत्याशी निर्मला भूरिया एक बार कांग्रेस से तो तीन बार भाजपा से विधायक बन कर जीत की हेट्रिक बना चुकी। निर्मला भूरिया एक बार फिर पांचवी बार विधायक के लिए भाजपा से टिकिट मिला। कांग्रेस ने इस बार फिर पूर्व विधायक वालसिंह मैडा को मैदान में मजबूती से उतारा। दोनों ने ही अपनी एडी चोटी का जोर लगाकर अपने-अपने पक्ष में मतदान कराया। अब देखना यह हैं कि निर्मला पांचवी बार जीतकर अपना वर्चस्व कायम रख पाती हैं या वालसिंह के पुनः खाता खुलने के साथ कांग्र्रेस अपनी खोई सीट पुनः अपने पक्ष में करने में सफल हो पाती है।
8 बार कांग्रेस जीती…तो 2 बार भाजपा
पेटलावद विधानसभा में 1967 से लेकर अब तक हुए नौ चुनाव (एक उपचुनाव) में सात बार कांग्रेस को जीत मिली तो एक बार जनता पार्टी व दो बार भाजपा को जीत का सेहरा बंधा। सन् 1967 में इस विधानसभा का गठन हुआ। तब यहां कांग्रेस के वेलसिंह ने एसएसपी पार्टी के प्रतापसिंह को हराया। 1972 में दिलीपसिंह (काग्रेंस) ने एक बार फिर प्रतापसिंह को हराया। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी के बैनर तले प्रतापसिंह को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के अमरसिंह को हार दिखाई। फिर 1980 व 1985 तक के चुनाव में गंगाबाई बारिया कांग्रेस की ओर से विधायक पद पर काबिज हुई। 1990 में कांग्रेस के वरसिंह भूरिया ने भाजपा के बाबुलाल गामड को हराया। श्री भूरिया के विधायक निर्वाचित होने के एक वर्ष बाद हत्या हो जाने के उपचुनाव में कांग्रेस की ही केसरबाई डामर को सफलता मिली। पटवा सरकार राज्य में काबिज होने के बाद भी भाजपा यहां से जीत नहीं देख पाई। फिर 1993 से लेकर 2003 के चुनावों में एक बार कांग्रेस से तो दो बार भाजपा से निर्मला भूरिया विधायक चुनी गई। इसके बाद वर्ष 2008 में फिर से कांग्रेस का खाता खुला और वालसिंह मैड़ा विधायक चुने गए। हालांकि वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर यह सीट गंवा दी और भाजपा की निर्मला भूरिया चैथी बार यहां से विधायक चुनी गई।
महिलाओं का रहा प्रतिनिधित्व….।
गठन से लेकर हुए 11 चुनावों में से 7 में महिला प्रत्याशी ही चुनी गई। दो बार गंगाबाई बारिया (कांग्रेस), एक बार केसरबाई डामर (कांग्रेस), चार बार से निर्मला भूरिया। पेटलावद विधानसभा के 41 वर्षो के कार्यकाल में 27 वर्षों तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा। इस बार 2018 के चुनावों में भी एक महिला प्रत्याशी निर्मला भूरिया दौबारा चुनाव में हैं।
दोनों ही दलों को जीत का आत्म विश्वास….
गत चुनावों से अधिक रहे मतदान के प्रतिशत को दोनों ही दल के नेता अपने-अपने पक्ष में होना बता रहे है। भाजपा का कहना हैं मतदाताओं ने विकास के नाम पर अधिक वोंटिग की तो कांग्रेस पंद्रह साल की एंटी इंकमबेंसी बता रही है। कुछ का कहना हैं चुनाव में खड़े हुए 7 उम्मीदवार भी एक कारण रहा है।
बागी बनाएगें इतिहास…..
भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों के बागी मजबूती से चुनाव लडें। जो प्रदेशभर के राजनीतिक हल्कों में चर्चा का चर्चा का विषय रहे। कही इस बार दोनों प्रमुख दलों को मतदाता नकारकर तीसरे को मौका न दे दें। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित इतिहास कायम होगा।
इंतजार 11 दिसंम्बर का….।
चाहे जो भी हो परिणाम अब इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन ईवीएम में कैद हो चुके है बस घोषणा होना शेष है, जो कि आगामी 11 दिसंबर को झाबुआ में होगी। परिणामों की घोषणा के साथ प्रत्याशीयों की राजनीतिक भविष्य की घोषणा भी इस दिन हो जाएगी।
महिलाओ ने किया अधिक मतदान….। 79.80 प्रतिशत हुआ मतदान….।
रिटर्निंग अधिकारी व एसडीएम आईएएस हर्षल पंचोली ने बताया की यहां विधानसभा में कुल 2 लाख 47 हजार 551 मतदाताओं में से 1 लाख 47 हजार 582 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। कुल 79.80 प्रतिशत मतदान हुआ।
जिसमें से 93 हजार 110 पुरूषो तथा 94 हजार 470 महिला मतदाताओ ने अपने मत का प्रयोग किया। इस बार मतदान का प्रतिशत गत चुनावो की अपेक्षा अधिक रहा। पिछली बार 2013 में 72.14 प्रतिशत मतदाताओ ने अपने मत का उपयोग किया था। पेटलावद विधानसभा में पुरूषो की अपेक्षा महिला मतदाताओ ने अपने मत का प्रयोग करने में अधिक रूचि दिखाई।

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