झाबुआ जिले मे प्लाज्मा डोनेशन के 4000 से अधिक पात्र लेकिन ना.प्रशासन की पहल ना डोनरो मे उत्साह

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चंद्रभानसिंह भदौरिया @ एडिटर इन चीफ़

कोरोना महामारी मे इलाज के अंतिम विकल्पों मे संक्रमित मरीज को संक्रमित होकर ठीक हो चुके मरीजों का प्लाज्मा चढाना भी शामिल है बात अगर झाबुआ जिले की करे तो सरकारी आंकड़ों मे अब तक 6058 लोग संक्रमित होकर ठीक हो चुके है इसमे 18 से 60 साल के स्वस्थ लोग अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकते है इन 6058 लोगो मे से करीब 4 हजार लोग प्लाज्मा डोनेशन की स्थिति में है लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से प्लाज्मा डोनेशन कैंप आयोजित नही किया गया है जबकि प्लाज्मा डोनेशन के पात्र लोगो सुची उपलब्ध है .. ओर प्लाज्मा डोनर भी देने को लेकर इतने अधिक उत्साहित नही है ।

प्लाज्मा डोनेट क्या है

प्लाज्मा थेरेपी, जिसे मोटे तौर पर कायलसेंट प्लाज्मा थेरेपी के रूप में जाना जाता है, कोरोनोवायरस संक्रमण के इलाज के लिए एक प्रायोगिक प्रक्रिया है। इस इलाज में, प्लाज्मा, खून का पीला लिक्विड हिस्सा, उस व्यक्ति से निकाला जाता है जो संक्रमण से उबर गया है और उस रोगी को इंजेक्शन लगाया गया है जो उस बीमारी से पीड़ित है। प्लाज्मा में एंटीबॉडी होते हैं जो रोगी को लड़ने और बीमारी से उबरने में मदद कर सकते हैं।

कौन कर सकता है प्लाज्मा डोनेट

कोविड-19 के मामले में, एक प्लाज्मा देने वाले को तकरीबन 28 दिनों में संक्रमण से उबर जाना चाहिए और 18 से 60 वर्ष की आयु के अंदर ही होना चाहिए। डोनर का वजन कम से कम 50 किलोग्राम होना चाहिए और उस समय वह किसी भी संक्रामक या पुरानी बीमारियों से पीड़ित नहीं होना चाहिए।

कौन नहीं कर सकता है प्लाज्मा डोनेट

जिसका वजन 50 क‍िलो से कम हो या अंडरवेट हो।
-जिसको डायबिटीज हो।
-जो महिला गर्भवती हो।
-जिसका ब्लड प्रेशर बेकाबू हो।
-जिसे कैंसर हो।
-जिसे फेफड़े / गुर्दे या दिल की गंभीर बीमारी हो।

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