राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु, राज्यपाल पटेल और सीएम डॉ. यादव ने किया योग, दिया स्वस्थ-संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश
दिनेश वर्मा, झाबुआ
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देश सहित मध्यप्रदेश की छटा योग के रंग में रंगी दिखाई दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के गैरीसन ग्राउंड पर आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में सहभागिता की। सभी ने योगाभ्यास किया और योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने, निरोग, स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल पटेल को प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया।
इस मौके पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज हम यहां भारत की उस महान परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया। योग विश्व समुदाय को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य उपहार है। यह हमारे ऋषियों और मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है। हमारे शास्त्रों में शरीर, मौन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। योग शब्द का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। ये व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और संपूर्ण मानवता को व्यापक विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

*करोड़ों लोग योग को बना रहे दैनिक जीवन का हिस्सा*
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की। इस पहल से पिछले 12 वर्षों से विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग पद्धति की पहचान और मजबूत हुई है। आज विश्व के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। इसी महीने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम वर्ल्ड योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप इसका एक अच्छा उदाहरण है। इस आयोजन में कई देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। हम कभी-कभी विदेशों में जाते हैं तो वो लोग योग के बारे में पूछते हैं। क्योंकि, योगाभ्यास विदेशों में भी किया जाता है। मुझे बताया गया है कि इस वर्ष योग की थीम ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’ है। हम आज जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही हमारे आने वाले समय के स्वास्थ्य एवं सुख का आधार बनती है। योग बढ़ती आयु से भी व्यक्ति के सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने की सहायक होता है। योग मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है।
*जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बड़ी चुनौती*
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हमारे सामने बड़ी चुनौती हैं। आज इन बीमारियों की रोकथाम करने के लिए समग्र चिकित्सा पद्धति का प्रयोग व्यापक रूप से हो रहा है। योग इस पद्धति का अहम हिस्सा है। यह सरल, प्रभावी और सुलभ है। भारत सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग शिक्षण, अनुसंधान और प्रशिक्षण तथा जन-जागरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। यह प्रसन्नता का विषय है कि अनेक संस्थाएं विश्व स्तर पर लोगों को योग के लिए प्रेरित कर रही हैं। मेरा मानना है कि योग से जुड़ी संस्थाओं के प्रयासों के बलबूते पर योग जन-जन तक पहुंचेगा। योग समस्त मानवता के कल्याण का आधार स्तंभ है। मैं इस अवसर पर सभी देशवासियों से यह संकल्प लेने का आग्रह करती हूं कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। ऐसा करके वे स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र और स्वस्थ विश्व के निर्माण में योगदान देंगे।
