आधा जुलाई बीतने के बाद भी खाली माही बांध, छोटे जलाशय भी तरसे

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सलमान शैख़@ झाबुआ Live

प्रदेश में मानसून उस गति से नही बरस रहा, जिस गति से अन्य प्रदेशों में बरस रहा हैं। भरपूर बारिश के अभाव में इस वर्ष जुलाई आधा बीतने के बाद भी डेम अभी बहुत खाली हैं। बांध में धार जिले व सीमावर्ती इलाकों में होने वाली बारिश सहित छोटी नदियों के पानी से जल आवक होती है, लेकिन जलग्रहण क्षेत्रों में खंडवृष्टि होने के कारण बांध में जल आवक बहुत कम है। मानसून का सीजन आते ही पूरे अंचलवासियों की निगाहें माही बांध की पूर्ण भराव क्षमता 451.50 मीटर तक जल स्तर पहुंचने पर लगी रहती है। बांध के पूर्ण भरने और इसके 8 गेट से खुलती अथाह जलराशि को देखने के लिए हजारों लोग उमड़ते हैं।
जल आवक का इंतजार-
अभी तक की अवधि में बांध 440 मीटर तक भराया है। अब बांध के जलग्रहण इलाकों में पर्याप्त बारिश होने और जल आवक होने का इंतजार हो रहा है। गौरतलब है कि माही बांध की नहरों से वर्ष 2012 में प्रथम बार सिंचाई हेतु जल प्रवाहित किया गया। माही का पानी कोदली, कारणगढ़ और मठमठ के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। झाबुआ जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पहाड़ियों के बीच माही नदी पर बने इस बांध की कुल लंबाई 3070 मीटर है जिसमें से 2680 मीटर मिट्टी का बांध तथा 390 मीटर पक्का बांध बनाया गया है। अधिशेष वर्षा जल निकासी हेतु बांध में 8 गेट लगाए गए हैं जिससे अधिकतम 8860 क्यूमेक लीटर प्रति सेकंड की गति से जल निस्तारित किया जा सकता है।
इन गांवो में पहुंचता है माही बांध का पानी-
माही बांध ने पूरे पेटलावद क्षैत्र की काया पलटी है। इस बांध से निकली नहरों का लाभ रामगढ़, बावड़ी, करड़ावद, करवड़, घुघरी, सारंगी, बोड़ायता, बरवेट, बैंगनबर्डी, मोहनपुरा, गुणावद, सहित क्षेत्र के बड़े हिस्से को मिल रहा है। इसमें 240 किमी क्षेत्र में फैली नहरों से लगभग 30 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होती है, वहीं नहरों का विस्तार करते हुए रायपुरिया, रूपगढ़, जामली, कोदली सहित अन्य क्षेत्र को लाभ भी मिलना प्रारंभ हो गया है, वहीं माही परियोजना के माध्यम से पूरे जिले में फ्लोराइड प्रभावित सैकड़ों गांवों को पेयजल के लिए शुद्ध पानी भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही कई बड़े कस्बों में इस योजना के माध्यम से पानी दिया जा रहा है।
अभी गत वर्ष से थोड़ा कम आया है पानी-
माही परियोजना के एसडीओ एमएस कुरैशी का कहना है कि माही बांध में गत वर्ष की तुलना में अभी पानी कम आया हैं। हालांकि अभी मानसून गया नही है, इसलिए हमें उम्मीद हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बांध अपनी क्षमता से अधिक और पिछले वर्ष के आंकड़े को छू लेगा।

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