भूपेन्द्रसिंह नायक, पिटोल लॉकडाउन के दसवें दिन दिन गुजरात और मध्य प्रदेश की बॉर्डर पर रोजाना की तरह दोनों प्रदेश के उच्च अधिकारियों की वार्तालाप समीक्षाएं होती है और अभी तो गुजरात की तरफ से कोई पलायन करने वाले मजदूर नहीं आ रहे है। रोड से कुछ मजदूर क्वॉरेंटाइन सेंटर में जाने के डर से रोड से 1 किलोमीटर दूर आसपास के गांवों से होते हुए पहाडिय़ों के रास्ते निकलने को मजबूर है। ऐसे में यहां भी यह मजदूर दिख जाते हैं उन्हें वापस पुलिस पिटोल बॉर्डर तक लाती है और क्वॉरेंटाइन सेंटर ले जाने के लिए प्रयास करती है परंतु किसी भी हाल में मजदूर अपने घर पहुंचने के लिए आतुर है। वह क्वॉरेंटाइन सेंटर में नहीं रहने की वजह से इतने कष्टों को पार करके भी अपने घर पहुंचना चाहते हैं। आज सुबह मध्य प्रदेश के गुना जिले के कुछ मजदूर रोड से दूर ग्रामीण क्षेत्रों की पगडंडियों से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे तब उनसे हमारे संवाददाता ने पूछा कि आप लोग क्यों ऐसा भटक रहे हैं। तब उन्होंने कहा कि क्वॉरेंटाइन सेंटर में रख देंगे और हम वहां नहीं जाना चाहते हैं। ऐसे में पिटोल बॉर्डर से खाद्य सामग्री के ट्रक सब्जी के ट्रक एवं गैस के टैंकरों से देश के अन्य हिस्सों में आपूर्ति के लिए आवागमन किया जा रहा है जिनके ड्रावर क्लीनर को बॉर्डर पर स्वास्थ्य चेकअप थर्मल स्कैनिंग कर उनके स्वास्थ्य को पूर्ण रूप से चेक किया जा रहा है। वही बॉर्डर पर झाबुआ पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ निर्देशों के अनुसार समय-समय पर ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों की ड्यूटी बदलती है वही झाबुआ पुलिस उप कप्तान विजय डावर हमेशा बॉर्डर पर उपलब्ध होते हैं जिससे कोई समस्या का समस्या हो तो उसका तुरंत समाधान किया जाए। Post navigation पारा क्षेत्र की छापरी रणवास पंचायत ने भीलवाड़ा से आये मजदूरों को किया क्वॉरेंटाइन मध्यरात्रि में गहरी नींद में सो रहे ग्रामीणों पर मकान का पाट टूटा, और इस तरह बच गई ग्रामीणों व पशुओं की जान