झाबुआ लाइव के लिये पारा से राज सरतालिया की रिपोर्ट वर्तमान समय में भगवान का अगर कोई स्वरुप होता है तो वो है गुरु क्योंकि गुरु ही होता है जो सभी जीवों के प्रति एक जैसा सोचता है , एक जैसा व्यवहार करता है। गुरु ही सच्चा पथ प्रदर्शक और अपने भक्तो को सत्य मार्ग दिखा कर तारने वाला होता है। जैन तत्व कहता है कि गुरु निर्गंथ हो अर्थात् उसके मन में राग – द्वेश , मोह – माया , छल – कपट तथा विषय – कसाय ना हो। सुगुरु वो है जो ब्रह्मचर्य की नव विध गुप्तियों को धारण करता है, क्रोधादी चार प्रकार के कषायो से मुक्त हो तथा अहिंसा, सत्य, अस्तेय , ब्रह्मचर्य और अपरिगृह इन पांच महावृतों से युक्त हों। ज्ञानाचार, दर्शनाचार, चारित्राचार, तपाचार, वीर्याचार इन पांच आचारों का पालन करने में समर्थ हो। पांच समिति तथा तीन गुप्ति का सम्यक आचरण करता हो इस प्रकार इन 36 गुणों से संपन्न साधक ही हमारा गुरु होना चाहिए। उक्त प्रेरक उद्गार चार्तुमास हेतु विराजित आचार्य देवेश लोकसंत श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी मसा की सुशिष्या अविचल दृष्टा श्रीजी मसा ने गुरु पुर्णिमा के अवसर पर स्थानीय गुरु ज्ञान मंदिर में हुई गुरु गुणानुवाद सभा में कहे। साध्वी भगवंत ने आचार्य देवेश लोकसंत को याद करते कहा कि वास्तव में गुरु कैसा हो , जो आत्म ज्ञान से युक्त हो, समदर्शिता और समता का आचरण करे। जो गुरु आत्म स्वभाव में रमण करे। वीतराग परमात्मा की वाणी सुने या सुनाए तथा परमश्रुत के अनुसार यानि जिनाज्ञा से अपना जीवन चलाए वही सद्गुरु कहलाता है। इसके साथ ही साध्वी भगवंत ने श्रावको से कहा कि बिना जाने गुरु की निंदा नहीं करनी चाहिए , ऐसे में घोर आशातना लगती है। और सच्चे गुरु जो करते हैं, जैसा सोचते हैं वो कभी – कभी हमारी समझ से परे भी होता है। सभा में श्रीसंघ महामंत्री राजेंद्र कोठारी ने भी गुरु के प्रति अपने भाव प्रकट किए। रविवार को गुरु ज्ञान मंदिर में हुए आयोजन में पुण्य सम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी मसा के चित्र को सिंहासन पर विराजमान कर वासक्षेप पूजन करने का लाभ प्रकाश छाजेड़ परिवार , साध्वीजी भगवंत को चारित्र वोहराने का लाभ मनोरमा मनोहर कर्नावट परिवार तथा कल्पत्र वोहराने का लाभ संघवी वाली बाई छाजेड़ परिवार ने लिया। चार्तुमास के दौरान साध्वीजी द्वारा इन शास्त्रो का वाचन किया जाएगा। Post navigation श्रावण में आठवां संगीतमय मास पारायण 10 से पूरे महीने होगी भक्ति चार्तुमास के दौरान बह रही है धर्म की गंगा